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संजय कुमार सुमन

नकारात्मक विचारों वाले लोगों से दूर रहें

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संजय कुमार सुमन

sk.suman379@gmail.com 

हमारे आसपास का वातावरण जैसा होता है हम वैसे ही हो जाते है इसीलिए हमारी संगत किसी ऐसे व्यक्ति के साथ है जो की अपने अंदर नकारात्मक विचार रखता हो तो हमें उनसे दुरी बना कर रखनी चाहिए। क्योकि उन्ही के अंदर से हमारे अंदर नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है। जिसकी वजह से नकारात्मक विचार आने लग जाते है।नकारात्मक विचार मन में जितने अधिक होंगे अवसाद की समस्या भी उतनी बढ़ती जाएगी। ऐसे में इन्हें खुद से दूर रखने का हर संभव प्रयास हमारे लिए जरूरी है। अगर आप भी अक्सर ऐसे नकारात्मक भावों से घिर जाते हैं तो अपनी भीतर छोटे-छोटे बदलाव करें और खुद को सकारात्मक दिशा में ले जाएं।

अगर ऐसा करने में आपको कोई दिक्कत पेश आ रही है या रात को बिस्तर पर पड़े-पड़े आप यही सोचते रहते हैं कि आज का दिन बड़ा खराब रहा और अब कल भी ऐसा ही बुरा गुज़रेगा तो मैं आपको एक टिप देता हूँ। उस पर अमल कीजिए: एक कागज़ लीजिए और उस पर पाँच ऐसी बातें लिखिए, जिनके कारण आपके चेहरे पर मुस्कान आ गई हो। सोने से ठीक पहले ऐसा कीजिए। जब भी आप नकारात्मक महसूस करें, अवसाद से घिर जाएँ, इस सूची को निकालकर पढ़ें, सोचें कि ऐसी अच्छी, मज़ेदार बातें भी आपके जीवन में होती रही हैं।आपको एक कहानी के माध्यम से मैं समझाने का प्रयास करता हूँ…

नकारात्मक विचार कोसी टाइम्स

दो मित्र थे । दोनों पढ़े लिखे थे लेकिन एक था सदा संतोषी और दूसरा था सदा असंतोषी।दोनों बड़े हुए । एक रेलवे का ड्राइवर बना और दूसरा दुकान का मालिक बना । दुकान का मालिक तो बना लेकिन इस मूर्ख को सदा फरियाद करने की आदत थी।  वह अपने मित्रों से बोला:“यार !  क्या जिंदगी है?  सुबह जल्दी-जल्दी दुकान पर जाना,शाम को थककर आना…. सामान लाना… मँगवाना..  यह सब झंझटें हैं।”फिर थोड़ी देर रुककर बोला: “परन्तु तू तो मुझसे भी ज्यादा दु:खी है।”
ड्राइवर मित्र :” कैसे?”
दुकान वाला मित्र :“काले-काले भूत जैसे रेलवे इंजन में बैठे रहना, गर्मी सहना,कभी इधर तो कभी उधर…. तेरी तो यार ! जिंदगी व्यर्थ है!”

नकारात्मक विचार कोसी टाइम्स

ड्राइवर मित्र संतोषी था। स्वीकारात्मक विचारोंवाला था वह बोला: “नहीं..नहीं..मित्र ! जिसका सोचने का ढंग गलत है उसकी जिंदगी व्यर्थ है जिसके पास सोचने का ढंग सही है उसी की जिंदगी सार्थक है।देख ,मैं अहमदाबाद से दिल्ली मेल ले जाता हूँ। गर्मी होती है तो दरवाजे में खड़े होकर खुली हवा,बिना पंखे की मुफ्त हवा खाता हूँ। सर्दी होती तो बॉयलर के निकट खड़ा रहता हूँ। लोग पैसे देकर टिकट खरीदते हैं और हम मुफ्त में घूमते हैं, ऊपर से वेतन मिलता है वह अलग।  हमारे जैसा सुखी कौन ?

ड्राइवर ने सुख माना और दुकानदार छाती कूटता है कि :“हाय ! रोज सुबह दुकान पर मरना पड़ता है, बही-खाते लिखने पड़ते हैं…….ऐसा करते-करते दैवयोग से, तरतीव्र प्रारब्ध से उस ड्राइवर का पटरियाँ पार करते-करते गलती से ‘एक्सीडेंट’ हो गया । टाँग कट गई । अस्पताल में उसका इलाज हो रहा था । बैसाखियाँ लेकर चल रहा था।  उस समय उस दुकानदार ने आकर कहा : “अरे मित्र !  क्या तेरी जिंदगी है ! पैर कट गया….. मैं तो पहले ही बोलता था कि तेरी यह जिंदगी बड़ी दु:खद है।”

काहे का दु:ख ! पागल कहीं के! मेरे जैसा सुखी तुझे कोई नहीं मिलेगा । मैं इतने दिनों से यहाँ हूँ तो भोजन तैयार मिलता है,सेवा मिलती है,वेतन भी चालू है। रविवार को घर जाता था तो आटा पिसाने जाना पड़ता था । अब उससे छुट्टी मिल गई  एक पैर हो गया । दोनों पैर में जूते पहनने पड़ते थे, अब एक से ही काम चल जाता है ।”

दुकानदार मित्र तो देखता ही रह गया।  ड्राइवर मित्र के पास सोचने का सही ढंग था स्वीकारात्मक विचार थे तो उसने दु:ख संयोग में भी सुख बना लिया।

नकारात्मक विचार कोसी टाइम्स

आपने एक फिल्म का ये डायलॉग तो ज़रूर सुना होगा कि – “अगर किसी चीज़ को पूरी शिद्दत से चाहो, तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने की साजिश करती है।” दरअसल ये कायनात जो आपके सपनों को साकार करती है, ये आप ही के अंदर मौजूद है और ये है आपका अवचेतन मन। हमारे दिमाग के दो हिस्से होते हैं जिन्हें चेतन मन और अवचेतन मन कहा जाता है। जहाँ चेतन मन हमारी सक्रिय अवस्था है जिसमें हम सोच-विचार और तर्क के आधार पर किसी भी कार्य को करने का निर्णय लेते हैं वहीँ अवचेतन मन उस कमरे के समान है। जहाँ हमारे सारे विचार, अनुभव और मान्यताएं जमा रहती हैं।

नकारात्मक सोच की स्थिति में मजबूत से मजबूत व्यक्ति भी निर्णय नहीं ले पाता। ऐसे में छोटे-छोटे निर्णयों लें और उनपर अमल करें। ये न सोचें कि आपके निर्णय का परिणाम क्या होगा, सिर्फ यह ध्यान में रखें कि एक बार अगर अपने किसी फैसले पर अमल किया तो वह एक अनुभव होगा और जीवन में कुछ न कुछ जोड़कर जाएगा।

जब भी आपके मन में कार्य को लेकर बुरे नकारात्मक विचार उभरने लगे अपनी यादो को वहां ले जाये जहां से ये नकारात्मक विचार उठने लगे थे यानि आप वहां से गलत थे, खुद से सवाल करे कि क्या वाकई वो गलत है। आप पाएंगे की आपकी शंका समाधान होने लगा है और आपका विश्वास उस कार्य से जुड़ गया है और नकारात्मकता हट गई है। क्या किसी कार्य को किये बगैर उसके नतीजे जान पाना संभव है नहीं । तो फिर आप कैसे सोच लेते है की आप कामयाब होंगे या फ़ैल।इसके लिए पहले आपको कोशिश करनी पड़ेगी उसके नतीजे निर्धारित करते है की आप कामयाब होंगे या फ़ैल। इसलिए पहले से ही परिणाम न सोचे पहले कोशिश करे लेकिन याद रखे आपका कार्य सही होना चाहिए।

नकारात्मक विचार कोसी टाइम्स

नकारात्मक सोच जीवन में निराशा उत्पन्न करता है। क्या आपने कभी सोचा कि मन में सबसे अधिक नकारात्मक सोच क्यों आता है। थिंकिंग रिसर्च में भी यही प्रमाणित हुआ है कि हमारे कार्य नकारात्मक ऊर्जा से प्रेरित होते हैं। नकरात्मक सोच हमें आनंद और स्वस्थ जीवन से दूर ले जाती है।

रिसर्च में भी यह बात सामने आई कि नकारात्मक विचार और भाव दिमाग को खास निर्णय लेने के लिए उकसाते हैं। ये विचार मन पर कब्जा करके दूसरे विचारों को आने से रोक देते हैं। हम केवल खुद को बचाने पर फोकस होकर फैसला लेने लगते हैं। नकरात्मक विचार के हावी होने के कारण हम संकट के समय जान नहीं पाते कि स्थितियां उतनी बुरी नहीं हैं, जितनी दिख रही हैं। संकट को पहचानने या उससे बचने के लिए नकारात्मक विचार जरूरी होते हैं, जो कि हमारे जैविक विकास क्रम का ही हिस्सा है, पर आज की जिंदगी में हर दिन और हर समय नकारात्मक बने रहने की जरूरत नहीं। इससे खुद का नुकसान ही होता है।

नकारात्मक विचार कोसी टाइम्स

आप भी सोचने का ढंग सही रखें सोचने का ढंग अगर गलत होगा तो तबाह हो जाएंगे। सोचने का ढंग सही होगा तो महान से  महान हो जाएंगे। शाद आबाद हो जाएंगे।
हमारे आसपास कई ऐसे लोग होते हैं जो नकारात्मक सोच की खान होते हैं। कोई भी ऐसे लोगों के बीच में रहना पसंद नहीं करता जो कि लगातार नकारात्मक बातें ही करते हैं। ऐसे लोगों से दूर रहने से मन को शांति और विवेक प्रदान करने में आपको मदद मिलेगी।आप भी नकारात्मक फरियादात्मक विचार करके दु:खी मत बनिये और सुख की आसक्ति करके सांसारिक विषयों में सुख बुद्धि करके सुख के भोक्ता भी मत बनिए वरन स्वीकारात्मक एवं उच्च विचार करके ईश्वर के मार्ग पर अग्रसर होते रहे। इसी में आपका कल्याण निहित है। ऐसा मेरा सोचना है कि सावधानी ही सुरक्षा है । नकारात्मकता से बचने के लिए सर्वोत्तम तरीका है कि आप नकारात्मकता लाने वाली चीजो से दूरी बनाएं।

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