Home » Recent (Slider) » राष्ट्रीय युवा दिवस विशेष : जीतने की जिद्द ने डॉ बीरेंद्र को बनाया आईएएस

राष्ट्रीय युवा दिवस विशेष : जीतने की जिद्द ने डॉ बीरेंद्र को बनाया आईएएस

Advertisements

प्रशांत कुमार

 

आज पूरे देश में स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिवस के अवसर पर राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जा रहा है ।ऐसे में आज हम आपको एक युवा आईएएस अधिकारी के बचपन से लेकर आईएएस तक के सफर से रूबरू करवाते है।इनकी जिद्द वाली जीत हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और अगर इस जिद्द को युवा आत्मसात कर ले तो वो भी कठिन से कठिन मंजिल को प्राप्त कर सकते है।

आज हम बात कर रहे है युवा आईएएस अधिकारी डॉ बीरेंद्र प्रसाद यादव की।वर्तमान में बीरेंद्र प्रसाद पिछड़ा ,अति पिछड़ा विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत है ।इससे पूर्व बिहार के मधेपुरा,शेखपुरा, कटिहार, भागलपुर और भोजपुर में जिला पदाधिकारी के कुर्सी पर तैनात हो फर्जीओं के लिए बेहद कड़क और अच्छे के लिए बेहद ही मिलनसार ,दोस्त के तरह कार्य करके खूब चर्चा बटोर चुके है।

डॉ प्रसाद बिहार कैडर के 2004 बैच के आईएएस अधिकारी है।इनके बचपन से आईएएस तक का सफर बड़ा ही चैलेंजिंग वाला है।श्री यादव को बचपन मे ही आईएएस बनने का सपना पाल रखा था ।जब वो 12 वर्ष के थे तब उन्हें किसी ने पूछा पढ़ लिखके क्या बनेंगे तो इनका जबाब था आईएएस जबकि फैमिली बैकग्राउंड था चिकित्सकीय।फैमिली में सभी यही चाहते थे कि ये पढ़ लिखके डॉक्टर ही बने लेकिन इनका मिजाज आईएएस बनने का था।

शुरआती पढ़ाई इनकी सरकारी विद्यालय से हुई जहां ये 12वीं तक कि पढ़ाई किये।सरकारी विद्यालय में वहीं सामान्य पढ़ाई होती थी जो सबके लिए बराबर था।न कोई ट्यूशन न कोई कोचिंग ।हिंदी मीडियम से पढ़कर अब ये आगे की ओर बढ़े तो इन्होंने एमबीबीएस एंट्रेंस दिया जहां इन्हें निराशा हाथ लगी ये एमबीबीएस एंट्रेंस में पास नही हो पाए लेकिन इन्हें वेटनरी मिल पाया।इन्होंने वेटनरी में ही दाखिला ले लिया ।चूंकि एमबीबीएस न इनका लक्ष्य था न इन्हें डॉक्टर बननी थी।इनका लक्ष्य तो पानी के तरह साफ था कि केवल आईएएस ही बनना है।

वेटनरी के दाखिला के बाद इनके फ्रेंड सर्किल में इनका मजाक उड़ने लगा कि ये जानवर का इलाज करेगा।जानवर के साथ रहेगा आदि आदि।मजाक उड़ता देख इनका हौसला और बढ़ता गया कि वेटनरी से ही हम आईएएस बनेंगे ।ये बात कि बिहार के वेटनरी कॉलेज से अब तक कोई आईएएस नही बना है इसके जिद्द को और मजबूत कर दिया कि बिहार के वेटनरी से पढ़कर सबसे पहला आईएएस मैं ही बनूँगा।

वेटनरी डॉक्टरी की पढ़ाई उपरांत डॉ बीरेंद्र पहली बार बिना किसी कोचिंग तैयारी के यूपीएससी प्री दिए और क्वालीफाई कर गए।हालांकि इनको अंतिम रूप से चयन नही मिल पाया फिर भी हार नही माने।पुनः तैयारी शुरू किए फिर इंटरव्यू राउंड तक गए लेकिन फिर भी सेलेक्शन से वंचित रहना पड़ा।दो बार इंटरव्यू राउंड तक जाकर छंटने के बाद भी आत्मविश्वास में कोई कमी आने नही दिया बल्कि जितनी ताकत से इससे पूर्व तैयारी किया उससे दोगुनी ताकत लगा फिर तैयारी किया।तीसरे प्रयास में डॉ बीरेंद्र प्रसाद ने हर रुकावट को तोड़ आईएएस तक का सफर पूरा कर लिया।

आईएएस बनते ही इन्होंने कई मिथक को तोड़ युवाओं को बड़ा संदेश दे दिया।बचपन मे पाले सपने को जिंदगी में उतारने की सीख, बिना ट्यूशन कोचिंग के भी आईएएस की ओर रुख कर फतह करना, सरकारी विद्यालय से पढ़ा बच्चा भी आईएएस बन सकता है ,सफलता में मीडियम का कोई बैंडिंग नही है आदि का सीख दी दिया।

निश्चित ही आज युवा दिवस के अवसर पर युवाओं को ऐसे प्रतिभा के कहानी को आत्मसात करना चाहिए और अपने जीवन मे उतार कर एक जिद्द के आगे जीत होती है की परिभाषा को जमीन पर उतार देना चाहिए।

Comments

comments

Advertisements
x

Check Also

सीतामढ़ी : कोरोना संदिग्ध की जानकारी देना पर गया महंगा ,कर दिया हत्या

सीतामढ़ी /बिहार बिहार के सीतामढ़ी जिले में कोरोना वायरस के संदिग्ध की जानकारी देने वाले एक युवक की पीट पीट ...