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मधेपुरा : सर्वश्री आशुतोष महाराज की शिष्या सुश्री कालिंदी भारती से बातचीत ।

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रंजीत कुमार सुमन

कोसी टाइम्स @ मुरलीगंज,मधेपुरा ।

 

दिव्य जागृति संस्थान के सौजन्य से मुरलीगंज में चल रहे नौ दिवसीय भागवत कथा यज्ञ में कथा प्रवचन करने आई आशुतोष महाराज जी की शिष्य कालिंदी भारती ने प्रेस वार्ता के दौरान सामाजिक चिंतन और सामाजिक विचारधारा पर अध्यात्म से जुड़े कुछ सवालों के जवाब दिए

* आस्था में लोगो को अलग अलग मंच की आवश्यकता हिंदू समाज में क्यों पड़ी

* कालिंदी जी ने बताया कि हमें धर्म की सही परिभाषा नहीं पता यह सच है कि भारत एक आध्यात्मिक देश है और हम आध्यात्मिक से दूर होते चले जा रहे हैं यह जितने भी मंच बढ़ रहे हैं इसके कारण समाज में अनैतिकता पापा चार आदि बढ़ रहे हैं। गुरुदेव आशुतोष महाराज जी का कहना है कि जब जब इंसान धर्म से दुरी बढ़ाएगा समाज में पापा चार और और नैतिकता बढ़ता चला जाएगा इंसान का रूट लेवल धर्म है और अगर धर्म ही खत्म हो जाएगा तो इंसान में अनैतिकता बढ़ती चली जाएगी आज सभी धर्म की बातें तो करते हैं धर्म को जीवन में कैसे उतारा जाए इसकी बात कोई नहीं करता
* आज समाज में धार्मिक तनाव और धार्मिक हिंसा बढ़ता चला जा रहा है जबकि धर्म भाईचारा सिखाता है इस पर आपके क्या विचार है

 

*  हम और हमारा समाज अलग-अलग संप्रदाय अलग-अलग धार्मिक विभाजन के कारण बता हुआ है हमारा धर्म सनातन धर्म है एक ही धर्म हो कभी वह हिंसा का मार्ग नहीं सिखाता आप इतिहास उल्टा करके देखें जितने भी रक्त रंजित होलिया खेली गई है इन्हीं संप्रदायवाद के नाम पर आप सोचिए क्या भगवान के मिलन का मार्ग हिंसा का मार्ग हो सकता है क्या परमात्मा जो शाश्वत धर्म है लड़ाई झगड़े के मार्ग पर अग्रसर कर सकता समाज में जो धार्मिक दंगे और उन्माद फैलाए जा रहे हैं अज्ञानता के कारण धर्म की सही परिभाषा हमारे समाज में बतलाई ही नहीं गई स्वामी विवेकानंद जी का विदेशों में गए थे उनसे भी पूछा जाता व्हाट इज रिलिशन तो उन्होंने कहा था,( रिलीजन रियलाजेशन आफ गोड) परमात्मा के साक्षात अनुभूति अपने घट के अंदर अनुभूति कर लेना यही सही अर्थों में धर्म है इंसान अगर इंसान को शाश्वत धर्म के साथ जोड़ना शुरू कर देगा उस दिन धर्म का साम्राज्य स्थापित होगा

* आज देश के अंदर धर्म के नाम पर कई अनैतिक कार्य हो रहे हैं इस पर आपका क्या विचार?

 

*  हमारे धर्म शास्त्र भी कहते हैं राजनीति और धर्म का एक समन्वय है जब राजनीति में से धर्म निकला है उसकी हालत ठीक वैसे ही है जैसे शरीर में से आत्मा का निकलना जब जब राजनीति ने संप्रदाय का सहारा लिया है तब तक रक्त रंजित होली खेली गई एवं अन्य अनैतिक कार्य हुए हैं राजनीतिक लोग सभी क्षेत्र के बाद के नाम पर कवि संप्रदायवाद के नाम पर सभी धर्म के नाम पर बांटकर आपस में लड़ाने का काम किया महापुरुष इस धरा पर जब जब भी आया है इसे बांटने का काम नहीं किया उन्होंने हमेशा जोड़ने का कार्य किया उन्होंने जाति धर्म संप्रदाय कुल वंश के आधार पर समाज को तोड़ने का काम नहीं किया उन्होंने सभी को एक किया है

 

* राजनीति को धर्म के साथ मिलाना कहां तक आप उचित मानते हैं

 

*  हम लोग राजनीति पर इतनी ज्यादा चर्चा नहीं करते यह हमारा क्षेत्र नहीं है हम अगर इंसान को साथ साथ धर्म से जोड़कर सही मार्ग देंगे पर ही राजनीति में परिवर्तन आ सकता है इसीलिए प्लेटो ने भी कहां हर जो अध्यात्म वाली है उसे राजा होना चाहिए नहीं तो एक राजा को अध्यात्म वादी जरूर होना चाहिए तभी समाज में और राष्ट्र में परिवर्तन आ सकता एक व्यक्ति ने महाराज जी से आकर कहा
गीता में धर्म पर बड़ी लंबी चौड़ी बात कही गई है गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है सारे धर्मों का परित्याग करके तुम मेरी शरण में आ जाओ दूसरी तरफ भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि जब जब इस धरती पर धर्म की हानि होगी तब तक मैं किसी न किसी रूप हर युग में अवतार धारण आता हूं यहां पर विरोधाभास हो जाता है हमारे महाराज जी ने बताया कि गीता संस्कृत में है और संस्कृत को सही रूप से परिभाषित कर उसे बताया जाना चाहिए और बताया भी

 

*  आप लोग जहां भी प्रवचन करते हैं वहां एक बड़ी भीड़ उपस्थित होती है आम जनता उपस्थित होते हैं लोग अपने जीवन में उतार नहीं पाते हैं इस कान से सुनता है उस काम से निकाल देते हैं

 

*  इस मंच से ईश्वर दर्शन की बात कही जाती है कल ही यहां से बहुत सारे लोगों ने यहां दीक्षा ली है आप उनसे संपर्क साध सकते हैं जो खुद बता देंगे कि उनके जीवन में परिवर्तन आ रहा है या नहीं पहले उनको जीवन में धारण करना होता है जब आचरण में उसे उतारेंगे तो उसका लाभ मिल सकता

 

* आशुतोष महाराज जी के समाधि में जाने पर बहुत सारा विवाद भी हुआ था हम जानना चाहते हैं क्या वे लौट के आएंगे,?

 

*  महाराज जी ने समाधि धारण की है यह कोई विशेष कार्य नहीं किया है हमारे यहां जो संस्कृति है उसी के अनुसार महाराज जी ने समाधि धारण की है आप इतिहास को देखें भारतवर्ष में ऐसे कई महापुरुष और कई सिद्ध पुरुष हुए हैं जिन्होंने समाधि धारण की है आदि गुरु शंकराचार्य जी समाधि धारण की थी समाधि धारण करने के बाद उनके जो शिष्य थे उन्होंने उनके शरीर को सुरक्षित रखा था इसी प्रकार रामकृष्ण परमहंस के साथ हुआ उन्होंने कहा कि महाराज जी ने कहा है कि एक समय आएगा मैं फिर इसी शरीर में लौट आऊंगा

*  अध्यात्म और विज्ञान दोनों दो किनारे हैं जो आपस में आज तक नहीं मिले हैं क्या ऐसा संभव है कि दोनों एक साथ चलें

 

*  एक बहुत बड़े वैज्ञानिक ने कहा है कि धर्म के बिना विज्ञान लंगड़ा है और विज्ञान के बिना अध्यात्म है वह अंघा है जब तक सही अर्थों में विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय में नहीं होगा तो विज्ञान एकाकी चल चलता रहेगा और इंसान सर्वनाश की ओर कदम बढ़ाता चला जाएगा इतिहास इस बात का साक्षी है विज्ञान ने जब जब धर्म का साथ छोड़ा है तो विज्ञान विनाशकारी से हुआ है।

 

*  राम मंदिर के मुद्दे पर पर दिव्य जागृति ज्योति संस्थान के क्या विचार,?

 

* मैं इस पर ज्यादा कुछ कहना नहीं चाहूंगा प्रभु श्री राम जी को अगर हम अंदर जान ले राम जो है रमण करने वाली शक्ति है वे कोई शरीर नहीं थे जो त्रेता युग में आए और राम राज्य की स्थापना कर गए क्योंकि राम जी की राम राज्य हमारे भीतर आज भी है हमें जानना पड़ेगा राम वास्तव में है क्या यह दिन राम जी को जानने वाली बात सही अर्थों में हमने जान लिया उस दिन या विवाद भी खत्म हो जाएगा।

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