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साहित्य : ठंढ़ के मौसम में कैसी होती है बच्चों की दुनिया

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~~ बच्चा आ ठंढा ~~

ठंढा सँ गाल गुलाबी भेल ,
रौद मे आँखि कखनो मुनैत
कखनो तकैत ,
मुलुर-मुलुर करैत ,
छोट सनक बच्चा ,

रंग-बिरंग के कपड़ा ,
छोटे सनक टोपी ,
छोटे सनक स्वेटर ,
छोट-छोट पाएर मे
छोटे-छोट मोजा ,
देखह् बच्चा के साज-सज्जा ,

एक रत्ती के हाथ
ओए मे दस्ताना ,
छोट सनक बिछौना ,
छोटे-छोट ओढ़ना ,
अहि सुन्नरता के
तकैत रही , अहि रहैत
सभहक सपना ।।

~ रुचि स्मृति

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