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वंचित समाज पार्टी को निर्वाचन आयोग ने दी मान्यता,पार्टी नेताओं में प्रसन्नता

संजय कुमार सुमन 

समाचार सम्पादक@कोसी टाइम्स 

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा वंचित समाज पार्टी को मान्यता देने पर पार्टी नेताओं ने प्रसन्नता व्यक्त की है। पार्टी नेताओं ने कहा है कि निर्वाचन आयोग द्वारा वंचित समाज पार्टी के निबंधन देने से मजबूत लोकतंत्र सबकी भागीदारी सुनिश्चित होगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष डा रतन मंडल ने कहा कि राष्ट्र के प्रति समर्पित, वंचितों, गरीबों व् शोषितों के लिए तैयार वंचित समाज पार्टी को भारतीय चुनाव आयोग  द्वारा मोहर लगा दी गयी है। वंचित समाज पार्टी समाज के दलित, पिछड़े,शोषित लोगों को आगे लाएगी । ‘वंचित समाज’ एक नये समाज के निर्माण के लिए संकल्पित होकर गोलबंद हो रहे हैं और यह गोलबंदी सत्ता-परिवर्तन ही नहीं बल्कि व्यवस्था परिर्वतन की दिशा में ‘भी नव-संदेश’ दे रहा है।बिना धर्म,जाति और समुदाय के भेद के बिना अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित देश के 92 प्रतिशत वंचितों को उनका समुचित हक दिलाना और उसके लिए संर्घष को आयाम देना ही वंचित समाज पार्टी का है मुख्य उद्देश्य है।

वंचित समाज पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो. परवेज अख्तर ने कहा कि श्रीमंडल छात्र जीवन से ही वंचित एवं समाज की मुख्यधारा से वंचित लोगों चाहे वह किसी भी जाति धर्म के हों के लिए निष्काम भाव से काम करते रहे हैं एवं संविधान सम्मत विचारधारा से ओत-प्रोत मंडल ने वंचित समाज के उत्थान के लिए अनेकों प्रशंसनीय कार्य किए। जो मील का पत्थर साबित हुआ है। आज इनके अगुवाई में वंचित लोग नए समाज के निर्माण के लिए कृत संकल्पित है।

उन्होंने कहा कि डाॅ.रतन मंडल आत्मा की आवाज पर अपने उसूलों पर चलने वाले वह नायक हैं जिन्होंने शुरु से लेकर आजतक अन्याय,जुल्म व शोषण के विरूद्ध अपनी आवाज इंकलाबी तेवर के साथ बुलंद करने का काम किया है।श्रीमंडल केवल बिहार ही नहीं,देश की राजनीति को एक नयी दिशा देने निकल पड़े हैं और उनका यह संकल्प देश की राजननीति के लिए “मील का पत्थर साबित होगा।

कौन हैं डा रतन मंडल

वंचित समाज पार्टी (वसपा) का उदय हो चुका है.इस राजनीति पार्टी को चुनाव आयोग ने भी अपनी मुहर लगा दी है।प्रो डॉ रतन मंडल यानी ‘अनमोल रतन’ इसके सुप्रीमो हैं।साथियों व कार्यकर्त्ताओं की बड़ी फौज खड़ी की जा चुकी है।इन्हें वीर तुम बढ़े चलो…..से उत्प्रेरित करने का सिलसिला भी जारी है।सूबे बिहार में इसकी धमक अभी दूर है।बहरहाल,आने वाले लोक सभा व विधान सभा चुनाव में पूर्व बिहार में इसकी घनचोट बेशक सुनाई पड़ेगी।कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले प्रो डॉ रतन मंडल का अनायास एक अलग राजनीति पार्टी बना विरोध के झंडे संग इरादों की डुगडुग्गी बजाना खतरनाक संकेत देने शुरू भी कर दिया है।पूर्व बिहार में सुशासन के खड़े महल भविष्य में ढह सकते हैं ऐसी झलक दिखने लगी है।इस अंदेशे को नकारा भी नहीं जा सकता है।विजयी डंका के साथ-साथ पूर्व बिहार की सीटों पर इसके घनचोट से कइयों की नींद उड़ेगी यह तय है।कहते हैं गंगा व कोशी के उत्तरी कछार पर बड़ी संख्या में इस वंचित समाज के लोग यानी गंगोत्री समाज रह रहे हैं।इनके जीवन यापन का एकमात्र सहारा गंगा की अविरल धार व उसमें व्याप्त “जलपरी” यानी मछली है।खेत-पथार तो गंगिया की कोख में कब का जा चुका है।जब निकलता है तो जिसकी लाठी उसकी भैंस का निवाला बन जाती है।घर यानी फ़ूश की मड़ई बाढ़ की भेंट वर्ष-दर-वर्ष चढ़ती रहती है।खानाबदोश जिंदगी से पस्त हो चुका यह समाज सरकारी उदासीनता के भी शिकार होते रहे हैं।यूं कहें यह समाज अरसे से छले गये हैं।अब तो इस समाज के साथ बहु-बेटी-रोटी का रिश्ता जोड़ मल्लाह,गोढ़ी,बिंद, सहनी,बनपर,मछुआरा सहित कई जाति जुड़ चुके हैं। इनके साथ रतन मंडल व उसकी टीम राज्य के वंचित जाति यानी समाज को जुड़ने का आव्हान भी कर चुकी है पश्चात जुड़ भी रही है।कहते हैं देश की आजादी के बाद से ही इस जाति के चंद चेहरों को ही नेशनल पार्टी में तरजीह दी गई। जिसमें गंगा पार के स्व ब्रह्मदेव मंडल (कांग्रेस),स्व महेश मंडल (राजद) व अजय मंडल (जदयू) मुख्य चेहरे हैं।लगता कुछ इसी उपेक्षा के कारण नगाड़े की यह अनुगूंज राजनीतिक फजाओं में घनचोट करने को आतुर हो उठी है।अंततः आगे-आगे देखिए होता है क्या ? गंगिया की करवटें कोहराम करती है यह जग जाहिर है।बेशक गंगा पुत्र रतन मंडल का आगामी चुनावी शंखनाद भी कोहराम करेगा।इस शंख ध्वनि बोले तो चुनावी ऊंट की करवटों का इंतजार सबको रहेगा।

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