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रविश रमण रचित कविता-पहला कदम

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माँ के मुख से ‘आह’ निकली होगी
जब हमने बढ़ाया होगा “पहला कदम”

गिरे भी होंगे,संभले भी होंगे
माँ ने लगाया भी होगा मरहम
जब हमने बढ़ाया होगा “पहला कदम”

आज हम बुलंदियो पर है,लेकिन
जिंदगी का वो ही पल था अहम
जब हमने बढ़ाया था “पहला कदम”

दुश्मन न पाल कर रखे ये वहम
हम दिखा देंगे उन पर कोई रहम
भारत माँ हर पल हमारे साथ है
हो वो हमारा आखिरी या “पहला कदम”

माँ से बड़ा कोई नही हमारा हमदम
माँ ही सिखाती हमे चलना “पहला कदम”

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