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मेहनत ही सफलता की कुंजी

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संजय कुमार सुमन
समाचार सम्पादक@कोसी टाइम्स 

“मेहनत इतनी ख़ामोशी से करो कि कामयाबी शोर मचा दे।”

यह पंक्तियां उन लोगों पर एकदम फिट बैठती हैं, जिन्होंने अपने काम को बड़ी खामोशी व खूबसूरती के साथ अंजाम दिया और जब उन्हें सफलता मिली तो उसे दुनिया ने सराहा।जीवन के अनुभव भी विचित्र ही होते हैं। पाया तो यही है कि जो न तो मेहनत करते हैं, न बुद्धि पर जोर डालते हैं और न ही  किसी भी वस्तु या विचार को गंभीरता से लेते हैं, बस बजते ही रहते हैं, वे ही खूब चलते हैं। जो चलता है वही प्रचलित होता है।सिखाया तो यही गया था और अब भी यही सिखाया जाता है कि मेहनत का फल मीठा होता है पर पाया यह गया है कि कि ऊपर चढ़ते जाने कि  लिए घटियापन का दामन थामना ही पड़ता है।समय के किस मोड़ पर मानव जीवन बाज़ार बन गया, मालूम नहीं,पर बना तो है यह पक्का है। श्रेष्ठ माने जाने वाले लोगों को भी देखा परखा और यही पाया कि जाने अनजाने में वे भी बड़ी सफ़ाई से घटियापन या खोखलेपन को छूते से रहते हैं।बजना है तो ढोल बनना ही पड़ेगा और ढोल बनना है तो खोखलेपन से कैसा परहेज़।

वह क्या करें जिनका अंतर्मन घटियापन और खोखलापन स्वीकार नहीं करता? माना यश तथा सम्मान आदि कामनाएं हैं अतः त्याज्य हैं। श्रमिक का न सही श्रम का सम्मान तो होना उचित है, निष्ठावान का न सही निष्ठा का सम्मान तो होना चाहिए,मानव का न सही मानवता सम्मान तो होना ही चाहिए पर ऐसा कुछ नहीं होता। ज्योतियाँ प्रज्वलित तो होती हैं पर भभक कर बुझ जाती हैं।

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मेहनत व लगन से आपके लिए अपनी मंजिल पाना खासा आसान हो जाता है। साथ में अगर प्लानिंग व टाइम मैनेजमेंट भी हो, तो आप कुछ भी कर सकते हैं।साइना नेहवाल, सुधा सिंह, सचिन तेंडुलकर, तान्या सचदेवा, दीपिका पल्लिकल, विश्वनाथ आनंद के नाम से भला कौन खेल प्रेमी परिचित नहीं होगा। 9 वर्ष की उम्र से साइना ने बैडमिंटन का रैकेट थामा और उसके बाद एक के बाद एक प्रतियोगिता जीतते हुए यह दिखा दिया कि मेहनत से कुछ भी पाया जा सकता है। ऐसा ही कुछ पाया हवा की रफ्तार से दौड़ने वाली ऐथलीट सुधा सिंह ने। चाइना में 2010 में आयोजित 16वें एशियन गेम्स में 3,000 मीटर की स्टीपल चेज दौड़ में भारत को गोल्ड मैडल दिलाने वाली सुधा ने अपनी मंजिल पाने के लिए कड़ी मेहनत की और अपनी मंजिल हासिल की।

बैडमिंटन खिलाड़ी साइना कहती हैं कि मंजिल तक पहुंचने के लिए लक्ष्य तय करना बेहद जरूरी है। अभी तक उन्होंने जो प्लानिंग की, उस तक पहुंची। अब उनका लक्ष्य बैडमिंटन की विश्व की नंबर वन खिलाड़ी बनना है। सफलता पाने के लिए सबसे पहले अपना लक्ष्य तय करें। उसके बाद उस तक पहुंचने के लिए प्लान तैयार करें। अपने लक्ष्य के मुताबिक प्रयासरत रहें। जैसे, उससे संबंधित ट्रेनिंग या डिप्लोमा लेना, कंपनियों से कम्यूनिकेशन बनाए रखना आदि।

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अगर कोई व्यक्ति अमीर बनना चाहता है तो उसके लिए सबसे जरुरी है की वह अपना एक लक्ष्य निर्धारित कर ले क्योकि अगर आप लक्ष्य को पूरा करते है तो आपको काम में सफलता मिलेगी और काम में सफलता मिलेगी तो आप वही काम करेंगे जिसमे की आपको पैसा मिले।मेहनत ही सफलता की कुंजी होती है। इसीलिए अगर आप पैसे वाले बनना चाहते है तो सबसे पहले आपको मेहनती बनना होगा। यदि आप मेहनती होते है तो निश्चित ही आप पैसे वाले बनने में कामयाब होना जरुरी है। अमीर बनना कोई आसान काम नहीं होता। इसके लिए हमें कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। अगर आप मेहनत के साथ कुछ और उपाय भी कर लेते है तो निश्चित ही आप पैसे वाले बनने में कामयाब होंगे। सबर का फल मीठा होता है ।आपने और हमने ये कहावत बचपन से लेकर बड़े होने तक कोई बार सुन्नी होगी और काफी हद तक यह कहावत सही भी है। क्योकि अगर हमारे पास धैर्य नहीं होता तो हम अपने अधिकतर कामो में जल्दबाजी करते है और काम ख़राब होता है। जिससे हमारा हौसला गिर जाता है और सफलता नहीं मिल पाती।

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कठोर परिश्रम या कड़ी मेहनत मनुष्य का असली धन होता है। बिना कठिन परिश्रम के सफलता पाना असंभव है। इस दुनिया में जो व्यक्ति कठिन परिश्रम करता है सफलता उसी का कदम चूमती है। कड़ी मेहनत करने वाले लोग मिट्टी को भी सोना बना देते हैं। यह तो एक साधारण तथ्य है की आज दुनिया भर में हर एक सफल व्यक्ति कुछ ना कुछ कष्ट सहने के बाद ही ऊँचाइयों पर पहुंच पाया है। हमको अपनी शिक्षा के  समय से उदाहरण लेना चाहिए  जैसे हम अगर पढ़ाई मेहनत से करते हैं तो हमारा परीक्षा फल भी अच्छा होता है और अगर हम पढ़ाई मैं आलसकरते हैं तो परीक्षा फल बहुत बुरा होता है।

सफलता कोई संयोग नहीं है, यह कठिन परिश्रम, दृढ़ता, सीखना पढ़ाई , बलिदान और सबसे ज्यादा, आप जो भी कर रहें हैं, या सीख रहे हैं, उसे प्यार करना है। -पेले

www.kositimes.com अगर आपके पास जुनून नही है, या आप उस जुनून को ढूंढ रहे है, तो मौजूदा समय में आपके हाथ जो कार्य है, बस उसी पर ज्यादा ध्यान दे। जब तक आप उसके कार्य में माहिर नहीं जाते, तब तक आप उस कार्य को ज्यादा समय दे। जैसे जैसे आप उस कार्य में माहिर हो जायेंगे, सफलता आपको जरूर मिलेंगी। सफलता प्राप्त करने का सबसे पहला पायदान सत्य की राह पर अग्रसर होकर चलना, सफलता प्राप्त करने के लिए इंसान को सबसे पहले उसको क्या करना उसके ऊपर ध्यान केंद्रित करना होगा; सही दोस्तों का चुनाव करना, अपनी रुचि के हिसाब का कार्य करना ,अथक परिश्रम करना, आप किस कार्य को बड़ी कुशलता पूर्वक कर सकते हैं। यह सुनिश्चित करना होगा और उसी कार्य पर अपना संपूर्ण ध्यान केंद्रित करना होगा ।फिर उसके बाद आप को तो सिर्फ आपकी मंजिल ही नजर आनी चाहिए ना कि रास्ते में आने वाली कठिनाइयां। फिर उसके बाद आपके पास जितनी भी ताकत है संपूर्ण ताकत उसी कार्य में लगा दीजिए।
सत्य की राह पर चलते चलते आपको रास्ते में ना जाने कितनी मुसीबतों का सामना भी करना पड़ सकता है, लेकिन आप उससे विचलित ना हो कर अपना कार्य  करते रहिए। कथनी और करनी हमेशा एक रखिए और समय-समय पर आत्ममंथन करते रहना चाहिए और अपनी गलतियों को स्वीकार करना सीखिए । अगर आपको आपकी गलती अगर कोई बताता है तो उस पर  क्रोध करने की बजाय आपसे गलती कहां पर हुई और क्यों हूं इस पर सोच विचार कीजिए।  गलती को सुधारना भी सीखिए। गलतियों से डरिए मत। गलतियां भी हमको बहुत कुछ सिखा कर ही जाती हैं ।वह हम पर ही निर्भर करता है। उन गलतियों से हम क्या सीखते हैं और क्या नहीं। जिस इंसान ने कभी गलती की ही ना  हो तो समझ लीजिए कि उसने कभी कुछ नया करने का प्रयास ही नहीं किया। और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कभी भी अपने रहस्य किसी के साथ साझा करना चाहते हो,अपने मन के अंदर ही रखें और उस अग्नि को जलाए रखें। ताकि आपको याद रहे कि मैं क्या करना चाहता हूं।
 दृढ़ संकल्प करें 
कोई भी कार्य को करने से पहले मन में यह दृढ निश्चय कर लें कि जब तक कार्य  पूरा नहीं होगा तब तक मैं पूरी ईमानदारी के साथ कड़ी मेहनत करूँगा। जब आप ऐसा ठान लेंगे तो ऐसा कोई भी कार्य नहीं जो आपके मेहनत के सामने टिक पाए। इसलिए हमेशा दृढ़ संकल्प कर के ही कोई कार्य शुरू करें।
बड़े तथा कठिन कार्य को देखकर घबराएं नहीं 
बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो बड़े व कठिन कार्य को देखकर घबरा जाते हैं। बड़े व कठिन कार्य को देखकर घबराना नहीं चाहिए बल्कि और प्रसन्न होना चाहिए। जब आप घबराने की बजाय प्रसन्न होंगे तो आपका ऊर्जा दुगुना हो जायेगा जिसके कारण आप कड़ी मेहनत कर पाएंगे। इसलिए दोस्तों कठिन व बड़े कार्य को देखकर घबराएं नहीं बल्कि प्रसन्न हो।
कार्य को शुरू करने से पहले उसे पूरी तरह से समझें
कितने लोग ऐसे होते हैं जो कार्य को पूरी तरह से समझते नहीं हैं और कार्य को शुरू कर देते हैं। इससे समस्या यह होती है कि जब आप थोड़ी देर तक कार्य करेंगे तो फिर सोचने लगेंगे की आगे कैसे होगा जिसके कारण आपका समय भी बर्बाद होगा और आप परेशान भी हो जाएंगे। इसलिए जब आपका बॉस आपको कोई कार्य समझाए तो उस कार्य को पहले पूरी तरह से समझ लें फिर उस कार्य को प्रारम्भ करें।
छोटी सी कामयाबी पर हों खुश
छोटी- छोटी कामयाबी से ही एक दिन बड़ी कामयाबी हासिल की जा सकती है। यह नहीं हो सकता कि आप करियर की पहली सीढ़ी में ही बड़ी कामयाबी हासिल कर लें। इसलिए पहले छोटी- छोटी बातों पर ही खुश होना सीखें।
आत्मविश्वास है ताकत
आत्मविश्वास हो, तो काम कर पाना आसान हो जाता है। अगर आप में कॉन्फिडेंस की कमी होगी, तो आपके लिए काम तरीक से पूरा कर पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
बातों का पॉजिटिव एंगल देखें
बातों का पॉजिटिव तरीके से देखें। कुछ लोगों की आदत होती है कि उन्हें कोई भी काम बता दें, वे उसका पॉजिटिव कम और नेगेटिव पक्ष ज्यादा सोचने लगते हैं। एक सर्वे के आधार पर यह बात साबित हो चुकी है कि अगर आपकी सोच काम के प्रति पॉजिटिव रहती है, तो आपकी मंजिल तक पहुंचने के चांस 50 प्रतिशत बढ़ जाते हैं। क्योंकि इसके बाद आप पॉजिटिव तरीके से चीजों को देखते हैं, तो आपको सब कुछ अच्छा और पॉजिटिव नजर आता है। अगर आपकी सोच नकारात्मक है, तो आपको यही लगता रहेगा कि आपकी किस्मत आपका साथ नहीं दे रही है।

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