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दुष्कर्म एक सामाजिक कलंक,हो मृत्युदंड की सजा का प्रावधान

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**महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा,एक गंभीर चिंता का विषय
संजय कुमार सुमन 
उप सम्पादक@कोसी टाइम्स 
हैदराबाद  के तेलंगाना में सात साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के आरोपी एक शख्स की भीड़ ने पत्थर मारकर हत्या कर दी.शराब के नशे में उसने अपने पड़ोसी की बेटी को चॉकलेट का लालच देकर अपने घर बुलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया. बच्ची के रोने की आवाज सुनकर गांववालों ने एक खेत में काम कर रहे उसके माता-पिता को सूचित किया. वह बच्ची को पास के गांव के अस्पताल ले गए. इस घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने सायन्ना को पकड़ कर पेड़ से बांध दिया और फिर उसकी पिटाई की. जम्मू-कश्मीर के कठुआ में बाकरवाल समुदाय की बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म से एक बार फिर पूरी भारत स्तब्ध है .बच्ची के साथ हुई दरिंदगी को लेकर देश उबल रहा है. बलात्कार की घटनाओं का देश भर में विरोध किया जा रहा है.
#खाकी_का_नशाः  दुष्कर्म करने पर बर्खास्त हुए सिपाही ने महिला से फिर किया दुष्कर्म

महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा आज हमारे देश में एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है.दुष्कर्म और छेड़ छाड की बढ़ती वरदातों से साफ जाहिर है कि देश में महिलाओं की सुरक्षा का दायरा दिन ब दिन सिकुड़ता जा रहा है. अपराधियों में कानून का डर तो है ही नहीं.जिसका परिणाम है कि दुष्कर्म की घटनाएं महामारी की शक्ल ले चुकी है. स्थिति की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महिला और बाल विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार देश में औसतन हर घंटे पर एक औरत का दुष्कर्म हो रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में प्रत्येक 54 मिनट में एक महिला के साथ दुष्कर्म की घटना होती है और इनमें से केवल 10 प्रतिशत घटनाओं की ही रिपोर्ट दर्ज हो पाती है. सेंटर फॉर वीमेंस डेवलपमेंट स्टडीज के आंकड़े तो कहते हैं कि भारत में हर 35 मिनट में दुष्कर्म की एक घटना होती है अर्थात प्रत्येक दिन 42 महिलाओं के साथ दुष्कर्म. भारत में आज 8 वर्ष से लेकर 55 वर्ष तक की महिलाएं दुष्कर्म की शिकार हो रही है. प्राप्त आंकड़े बताते हैं कि दुष्कर्म के लगभग 70 प्रतिशत मामाले 12 वर्ष से लेकर 18 वर्ष तक की लड़कियों से संबंधित है. 36 प्रतिशत दुष्कर्म की घटनाएं घर की चहारदीवारी के भीतर करीबी रिश्तेदार द्वारा ही अंजाम पाती है वहीं 46 प्रतिशत मामलों में पड़ोसियों एवं परिचितों को इसका जिम्मेदार ठहराया गया है. जबकि अजनबियों द्वारा दुष्कर्म की शिकार महिलाओं का 18 प्रतिशत ही दर्ज किया गया है.

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आज महिलाएं अपने आस पास में भी सुरक्षित नहीं है. शहरों ही नहीं,गांव कस्बों में भी कॉलेज और बाजार जाने वाली लड़कियों के साथ छेड छाड़ और दुष्कर्म जैसे अपराधों से जुड़ी खबरें आये दिन सुनने और पढ़ने को मिलती रहती है. ना तो सरकार इस दिशा में कोई सफल कदम बढ़ा पा रही है और ना ही कानून इस सुरक्षा को खत्म करने वालों को कोई सख्त सजा सुना पा रहा है. ऐसे में महिलाएं किस तरह अपनी सुरक्षा के प्रति सचेत नजरिया अपना कर खुद को अनहोनी से दूर रख सकती है. इन दिनों दुष्कर्म की घटनाएं इतनी तेजी से बढ़ रही है कि भारतीय विधि आयोग ने देश के वर्तमान दुष्कर्म कानूनों में काफी बदलाव लाने का सुझाव दिया है. आयोग के अनुसार इसके लिए विशेष न्यायालय गठित करना चाहिए. दिल्ली,उत्तर प्रदेश और राजस्थान में तो सामूहिक दुष्कर्म के मामले होते ही रहते हैं. महिलाओं का दुष्कर्म करना कुछ लोग अपनी शान की बात समझते है.

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दिल्ली की व्यस्ततम सड़क पर दिन दहाड़े मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज की 24 वर्षीया छात्रा को चार लोगों ने छूरा दिखाकर अगवा कर लिया और घसीटते हुए पास के मौजूद ऐतिहासिक खूनी दरवाजा के पास ले जाकर दुष्कर्म किया.बिहारीगंज थाना के हथिऔंधा पंचायत के पिरोकिया में एक नाबालिक लड़की के साथ दुष्कर्म किया गया.रक्सौल प्रखंड क्षेत्र के हजमा टोला गांव की एक नाबालिक युवती के साथ एक गेस्ट हाउस में दुष्कर्म किया गया.भोजपुर जिले के कोईलवर थाना क्षेत्र के कायमनगर गांव में आधार कार्ड बनवाने गई एक छात्रा के साथ हथियार के बल पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया.सिवान के भगवानपुर थाना के एक गांव में युवती के साथ दुष्कर्म कर उसका वीडियों तक बना कर गांव में बनाए सोशल मीडिया ग्रूप में किया पोस्ट कर दिया गया.

भागलपुर जिले के कहलगांव थाना क्षेत्र की सिंया पंचायत के गम्हरपुर में सात साल की एक बच्ची के साथ गांव के ही एक नाबालिग लड़के ने दुष्कर्म किया. इस बाबत बच्ची के परिजनों ने कहलगांव थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी है. आवेदन के अनुसार 24 नवंबर शुक्रवार को बच्ची के घर के सभी सदस्य खेत में काम करने गये थे. घर पर बच्ची अकेली थी. पड़ोस का ही एक 15 साल का लड़का घर घुस गया और बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. जब खेत से परिवार के लोग घर पहुंचे तो बच्ची को कराहते पाया. पूछने पर बच्ची ने सारी बात बतायी. घरवालों ने समाज के लोगों को जानकारी दी. इस बीच आरोपित किशोर फरार हो गया. पीड़ित बच्ची की मां ने लड़का, उसकी मां, पिता और दादा के खिलाफ रविवार को कहलगांव थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी है. बच्ची के मेडिकल जांच के लिए भागलपुर सदर अस्पताल भेजा गया है. पुलिस आरोपित को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी कर रही है.    

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 कोढ़ा थाना क्षेत्र के मवैया गांव में नाबालिग बच्ची के साथ दबंग परिवार के एक युवक ने दुष्कर्म किया और फरार हो गया. पीड़ित बच्ची का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार करने के बाद उसे सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया. वहीं पुलिस ने छापेमारी कर घटना के कुछ घंटे बाद ही आरोपित युवक को गिरफ्तार कर लिया. पीड़ित बच्ची के दिव्यांग पिता ने रोते हुए कहा कि कहां से हम अपनी बच्ची का इलाज करा सकेंगे. बड़ी मुश्किल से दो वक्त की रोटी का जुगाड़ होता है. दबंगों ने हमारी इज्जत को नीलाम कर दिया.
जानकारी के अनुसार, आठ वर्षीया बच्ची मुसलिम गर्ल्स मदरसा मवैया टोला से पढ़ कर घर आ रही थी. इसी दौरान गांव के ही एक युवक बच्ची को बहला-फुसला कर बगीचे में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया. घटना को अंजाम देने के बाद युवक मौके से फरार हो गया, जबकि रोती-बिलखती बच्ची घर पहुंची और आपबीती परिजनों को बतायी. परिवार के लोग शिकायत करने आरोपित के घर पहुंचे, तो दबंगों ने गरीब परिवार को डांट-फटकार कर भगा दिया. ग्रामीणों के सहयोग से गंभीर अवस्था में पीड़ित बच्ची के साथ परिजन थाने पहुंचे. पीड़ित बच्ची की मां ने बताया कि वह कई वर्षों से मवैया गांव में अपने पिता के घर रह कर मेहनत मजदूरी कर गुजर बसर करती है. बच्ची मदरसा में ही पढ़ती है. घटना के बाद पीड़ित बच्ची डरी-सहमी है. परिजनों का कहना है कि आरोपित युवक का परिवार दबंग है. पुलिस में शिकायत करने के बाद उन्हें चिंता सता रही है, कहीं उनके साथ भी कोई अनहोनी न हो जाये. थानाध्यक्ष अनोज कुमार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बच्ची का प्राथमिक उपचार करवाया, जहां से उसे सदर अस्पताल भेज दिया गया. उन्होंने बताया कि सूचना मिलने के कुछ घंटे बाद ही छापेमारी कर आरोपित युवक को गिरफ्तार कर लिया गया है.

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कानून से दुष्कर्मियों को कोई परेशानी नहीं होती है

न्यायालय में सब कुछ इतनी धीमी गति से चलता है कि फैसला होने में कम से कम पांच से दस वर्ष तो लग ही जाते हैं. हालांकि अभी स्पीडी ट्रायल से मामले जल्दी निपटाये जा रहे हैं. अदालत में जिरह के दौरान दुष्कर्म की शिकार हुई औरत को बार बार उसी मानसिकता और शारीरिक यंत्रणा से गुजरना होता है. उसे भरी अदालत में बताना होता है कि किस प्रकार दुष्कर्मियों ने उसके साथ दुष्कर्म किया वर्ना दुष्कर्मी को सजा नहीं मिलेगी. समाज भी उस औरत को हीन दृष्टि से देखता है. बहुधा उसे परिवार और समुदाय से अलग कर दिया जाता है. दुष्कर्म उस औरत की पूरी जिदंगी को अभिशप्त कर देता है. भारतीय दंड संहिता की धारा 375 और 376 के तहत दुष्कर्मियों को सजा दी जाती है. दुष्कर्म को कम से कम सात वर्ष और अधिक से अधिक आजीवन कारावास की सजा मिलती है. कानून के अनुसार किसी मर्द को तभी दुष्कर्मी माना जायेगा जब उसने उसकी इच्छा के खिलाफ,उसे या उसके किसी निकटवर्ती संबंधी को मार डालने का या शारीरिक क्षति पहुंचाने की धमकी देकर उसे राजी करना,नशीले पदार्थ खिलाकर उसे राजी करना,अगर वह 16 वर्ष से कम उम्र की हुई तो उसकी इच्छा या अनिच्छा के विरूद्ध किसी औरत के साथ यौन समागम किया हो. राजी नहीं होना ही दुष्कर्म के मामले का केन्द्र बिन्दु बनता है.

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1983 में एक मुकदमें का फैसला देते हुए न्यायमूर्ति एपी सेन और एमपी ठक्कर ने कहा कि वर्तमान भारतीय परिवेश में जब भी कोई महिला या लड़की दुष्कर्म के मामले को सामने लाती है तो वह निश्चिंत रूप् से अपने परिवार,मित्रों,संबंधियों,पति,भावी पति आदि की नजरों में गिरने,घृणा की पात्र बनने जैसे खतरे उठाकर ही अदालत का दरवाजा खटखटाती है. ऐसे में संभावना अधिकार इस बात की होती है कि मामला सच है झूठ नहीं.इसके विपरीत राममूर्ति बनाम हरियाणा के विवाद में देव समाज स्कूल अंबाला में 9 वीं की छात्रा सतनाम कौर के साथ चार व्यक्तियों ने सप्ताह भर तक दुष्कर्म किया किन्तु सर्वोच्च न्यायालय से सभी अभियुक्त इस आधार पर छूट गये कि सतनाम कौर संभोग की आदी थी और उसकी यौन झिल्ली पहलेू से भंग थी.

इन दिनों सारी दुनिया में दुष्कर्मियों में बलात्कारियों को सख्त सजा देने की मुहिम चल रही है किन्तु यह भी सोचना होगा कि दुष्कर्म के मामले बढ़ते क्यों जा रहे हैं. इसके पीछे कई बातें हैं. पुरूष वादी मानसिकता दुष्कर्म की घटनाओं के लिए सबसे अधिक दोषी है. पुरूष की आक्रामक यौन इच्छा स्त्री को केवल एक उपभोग की वस्तु समझने के कारण होती है. नैतिकता के हवस क्रम में पुरूष ने स्त्री के प्रति व्यवस्था और लोकतांत्रिक व्यवस्था में अंतर सिर्फ इतना रह गया है कि सामंतवादी व्यवस्था में कानून के अभाव में दुराचार की घटनाएं होती थी और लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून के दायरे में सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में विभिन्न चैनल पर फैशन,मनोरंजन के नाम पर कामूकता,इंटरनेट पर अश्लील सामग्री,अश्लील चैंटिग और लड़कियों का उत्तेजक लिबास पहनना,फिल्मों में छेड़खानी को ‘‘ ग्लेमराइज’’ करना अश्लील फिल्मे आदि.

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यह एक स्याह सच भी है कि अधिकतर मर्द दुष्कर्मी नहीं होते वरना औरतों का मर्दो पर से विष्वास ही ख्त्म हो जाता. वे उन्हें अपना दुश्मन समझने लगती। दुष्कर्मी के मामले में मृत्युदंड के प्रावधान से ही समस्या सुलझ जाएगा ऐसा नही माना जा सकता है. मनोवैज्ञानिक और विधि विषेज्ञ मानते हैं कि केवल कानून में फेरबदल ही अपराध उन्मूलन का एक मात्र रास्ता नहीं हो सकता. तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने 26 नवम्बर 1998 को लोकसभा में कहा कि दुष्कर्मियों के लिए मृत्युदंड की सजा तय करने के पक्षधर है लेकिन इस विषय में सभी राजनीतिक दलों तथा राज्य सरकारों से विचार विमर्श करके निर्णय लेंगी परन्तु महिला संगठनों ने इस विचार का जबरदस्त विरोध किया. विधि विशेषज्ञ एवं महिला संगठनों का मानना है कि ऐसे प्रावधान किए जाने से दुष्कर्म के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए पीड़ित महिला की हत्या करने की प्रवृत्तियां बढ़ेगी. इसलिए बेशक कानून में फेरबदल हो पर उससे भी जरूरी यह है कि हम यानि समाज अपनी मानसिकता भी बदलें. महिलाएं अपने आचरण,तौर तरीके तथा सुदर दिखने की परिभाषा पर पुनर्विचार करें तथा शालीन कपड़े पहने.

पांच दरिंदों ने नाबालिक के साथ किया गैंगरेप फिर विडियो किया वायरल

एक महादलित नाबालिक लड़की से सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है,इतना ही नहीं दुष्कर्मियों ने मोबाइल से आपत्तिजनक तस्बीर भी वायरल कर दिया है. ये  घटना  खुटौना थाना के एक गांव की है,जहाँ पांच युवको ने एक लड़की को रात में शौच के दौरान अकेला पाकर दबोच लिया और मुह दबा कर एक शिक्षा के मंदिर खण्डहरनुमा संस्कृत विद्यालय में ले जाकर  चाकू की नोक पर  उस युवती के साथ  बारी -बारी से सामूहिक दुष्कर्म किया.इतना ही नहीं दुष्कर्म के दौरान आरोपियों द्वारा मोबाईल से आपत्तिजनक तस्बीर भी खीच लिया गया और धमकी दी की किसी को बताने पर उसे जान से मार देंगे और तस्बीर को नेट पर डाल देंगे. इस मामले को पीड़ित परिवार के द्वारा गांव के लोगो  के समक्ष रखी तो दबंगों ने पंचायत के फैसले को मानने सी इन्कार कर दिया और युवती की तस्बीर को वायरल कर दिया.

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इसके बाद  पीड़ित परिवार खुटौना थाना पहुँच पुलिस को मामले कि जनकारी दे आरोपियों से जाना -माल की रक्षा के साथ  कार्यबाई की गुहार लगाई. खुटौना थाना ने मामले से पल्ला झाड़ते हुए घटना को महिला थाने से सम्बंधित बता पीड़ित परिवार को मधुबनी भेज दिया.वहीं महिला थाना की पुलिस ने  पीड़िता को मेडिकल के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है और मामले की तफ्तीश में जुट गयी है.एसएसपी की माने तो मामले की तफ्तीश की जा रही है जो लोग भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी. बहरहाल दुष्कर्मियों की दबंगता की वजह से खुटौना थाना कोई कार्रवाई नहीं कर रही है,वही  दबंगो के भय से पीड़ित का पूरा परिवार दहशत में है. बता दें की ये घटना करीब एक महीने पहले की है.अभी जब पीड़िता की आपत्तिजनक तस्वीर वायरल हुई तो मामला सामने आया और पीड़ित पक्ष पुलिस के पास पहुंची.

Image result for दुष्कर्मजम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म पर लोगों के रोष के बाद केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि उनका मंत्रालय बच्चों के साथ दुष्कर्म के दोषियों के लिए मृत्युदंड की सजा के प्रावधान के लिए पॉक्सो एक्ट में संशोधन की मांग पर विचार कर रहा है. उन्होंने एक संदेश में कहा, “मैं कठुआ में एक बच्ची से दुष्कर्म और हाल ही में बच्चों के साथ हुए दुष्कर्म के मामलों से बहुत व्यथित हूं. मैं और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा (पॉक्सो) एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव रखेंगे, जिसके तहत 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ दुष्कर्म करने वालों के लिए मृत्युदंड की सजा का प्रावधान हो.”

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