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गीत / गजल

साहित्य:दहेज प्रथा

दहेज प्रथा हमारे पूरे समाज में एक विकराल राक्षस का रूप धारण कर सुरसा सा मुँह लिए हमारी बहु- बेटियों ...

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साहित्य:”हाँ मैं प्रसिद्ध होना चाहती हूँ”

“हाँ मैं प्रसिद्ध होना चाहती हूँ” क्या करना होगा अपना चेहरा रोज रोज गमकऊँआ साबुन से चमकाना होगा फेरनलवली खूब ...

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साहित्य:”मैं नन्हा कुकुरमुत्ता हूँ”

कुकुरमुत्ता हर क्षेत्र में काव्य-आभिजात्य से मुक्ति का एक संदेश देता है।कुकुरमुत्ता, कुमारी अर्चना की एक प्रसिद्ध लंबी कविता है जिसमें ...

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साहित्य:अपने हाथों से तेरे रूप सवाँरू

सत्य की अनुभूति को ही कविता माना है। संसार के सुख-दुख से परे कविता का मधुर और अनूठा संसार मनुष्य ...

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कविता : भय और भूख

~~ भय और भूख ~~ घास की चादर फैली है दो नन्ही-नन्ही मैना फुदक रही उसपे , कभी इधर देखे ...

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साहित्य:”हम राम तो बन नहीं सकते”

हम राम तो बन नहीं सकते फिर रावण ही बन कर दिखायें क्योंकि कई सन्दर्भों में कई मायनों में रावण ...

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कविता : बिहार मेरा गुरूर ,मेरा अभिमान !

~~ बिहार मेरा गुरूर ,मेरा अभिमान ~~ अब बात ज़ुबां पर आई है, तुम सुनना ज़रा सा गौर से, अब ...

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कविता : चाँद से सीखो जीवन गीत

~~ चाँद से सीखो जीवन गीत ~~ जिंदगी के गीतों को गाएं हर पल मुस्कुराएं ! जीवन तो जग जीता ...

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