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गीत / गजल

शिवम गर्ग की रचना- “ठंढ”

ठंड मुझे तुमसे गीला है, तू मजदूरों से क्यों मिला है, जा बैठ जाके आलीशान महलों के चौखट पर, रख ...

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“जीना मुश्किल-रहना मुश्किल”

जीना मुश्किल-रहना मुश्किल किससे कहना–क्या कहना छिपता-फिरता व्यवहार है नज़रें चुराते दिख रहे सब– क्या अंधों का संसार है–(?) मूकदर्शक ...

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“फीके से जज़्बात क्यूँ है”

फीके से जज़्बात क्यूँ है ऐसे ये हालात क्यूँ है फीके से जज़्बात क्यूँ है धीमी है आवाज़ दिल की ...

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“आओ हम खुद से ही प्यार करें”

आओ हम खुद से ही प्यार करें आओ दोस्तों मिल बैठ कर, हम सब बातें दो-चार करें; प्यार तो प्यार ...

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साहित्य : ठंढ़ के मौसम में कैसी होती है बच्चों की दुनिया

~~ बच्चा आ ठंढा ~~ ठंढा सँ गाल गुलाबी भेल , रौद मे आँखि कखनो मुनैत कखनो तकैत , मुलुर-मुलुर ...

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“मुहब्बत का बाजार”

💝”मुहब्बत का बाजार”💝 मुहब्बत के बाजार में हर कोई, अपना दिल बिछाएं बैठे हैं; किसी का दिल जल्द बिक जाता, ...

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“मानवाधिकार”

मानवाधिकार आईए हम सभी मिलकर बातें करते हैं मानवाधिकार की, है तो ये बहुत हीं साधारण सब बात पर है ...

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“अशांतमन की शांति”

अशांतमन की शांति  चुप-चाप दबे पांव शांति … अशांत मन की साथी बन जाती है… जब बेबसी की एक लकीर ...

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