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शेर ओ शायरी

अब वो रात नही-शिवम गर्ग

*तूने की बेवफाई अब याद नहीं* *आज नजरें भी चुराई अब याद नहीं  *दिल ही रूठा है मेरा, मैं टूटा ...

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क्योंकि वो हारा नहीं, एक अजय विजेता है -प्रीति भारती

सब चले जा रहे हैं , अपनी मंज़िल की तलाश में , कुछ के लिए है मखमल का रस्ता , ...

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रविश रमण रचित कविता-पहला कदम

माँ के मुख से ‘आह’ निकली होगी जब हमने बढ़ाया होगा “पहला कदम” गिरे भी होंगे,संभले भी होंगे माँ ने ...

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फारबिसगंज के रवीश रमन रचित कविता- “मज़हबी रंग”

“मज़हबी रंग” कभी-कभी अजीब लगता है देख कर हो जाता हूं दंग मजहब बताने लगा है हमारा और तुम्हारा रंग ...

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रवीश रमन रचित कविता ●”मज़हबी रंग”

“मज़हबी रंग” कभी-कभी अजीब लगता है देख कर हो जाता हूं दंग मजहब बताने लगा है हमारा और तुम्हारा रंग ...

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