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साहित्य

साहित्य में आज पढ़िए ट्विंकल की रचना, तू जीवित शक्तिशाली नारी हैं…..

तू डर के मत रह, तू मुँह बंद कर के न सह मत बन अबला कि तेरी पहचान भारी हैं, ...

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तुम कहो तो आज आसमाँ पे कहानियाँ लिख दूँ……साहित्य में आज पढ़िए सलिल सरोज जी को

तुम कहो तो आज आसमाँ पे कहानियाँ लिख दूँ तुम्हारे हुश्न की मस्ती,अपनी जवानियाँ लिख दूँ तेरे छलकते हुए मदहोश ...

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साहित्य”आज की नारी”

आज की नारी आज की नारी कहती – मुझे किसी के भी स्नेह भरी छाँव की जरूरत नहीं, अब अकेले ...

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साहित्य”उजड़े को न उजाड़ो” 

उजड़े को न उजाड़ो  उजड़े को न उजाड़ो बिखरे को न बिगाड़ो नसीब उनसे रूठा हारे को न पछाड़ो । ...

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रविश रमण रचित कविता-पहला कदम

माँ के मुख से ‘आह’ निकली होगी जब हमने बढ़ाया होगा “पहला कदम” गिरे भी होंगे,संभले भी होंगे माँ ने ...

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फारबिसगंज के रवीश रमन रचित कविता- “मज़हबी रंग”

“मज़हबी रंग” कभी-कभी अजीब लगता है देख कर हो जाता हूं दंग मजहब बताने लगा है हमारा और तुम्हारा रंग ...

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साहित्य”होनी ज़रूरी है-अपनी राष्ट्रभाषा”

होनी ज़रूरी है-अपनी राष्ट्रभाषा माना कि,देश अपना बड़ा महान है विशाल लोकतंत्र का विश्व-मान है समृद्ध भाषाओं की यहाँ ख़ान ...

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पत्रकार और समाज:एक सिक्का के दो पहलू

संजय ‘विजित्वर’ पत्रकारिता को पूजा ,यज्ञ, धारा,दर्पण इत्यादि शब्दों से परिभाषित करते हैं और पत्रकार पुजारी, यज्ञकर्ता, सचेतक , प्रहरी, ...

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