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साहित्य

तुम दीपक की तेज रोशनी और मैं जलता बाती हूँ ,साहित्य में आज पढ़िए प्रिंस की कविता

  तुझको सोचूँ , तुझको देखूँ खुद में तुझको पा भी लूँ तेरे बोल के सातों स्वर को खुद हीं ...

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बदलें खुद की नकारात्क सोच को

संजय कुमार सुमन  sk.suman379@gmail.com    “कश्तियाँ बदलने की जरुरत नहीं दिशा को बदलो तो….. किनारे खुद पे खुद बदल जाते है” दोस्तों,आज मैं ...

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जीवन में सफलता का आधार है धैर्य

संजय कुमार सुमन  sk.suman379@gmail.com  जीवन में सफलता कौन नहीं चाहता।  हर व्यक्ति अपने जीवन में सफलता की ऊँचाई चढ़ना चाहता ...

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प्यार झूठा मोहब्बत भी झूठी

प्यार झूठा मोहब्बत भी झूठी प्यार झूठा मोहब्बत भी झूठी अब किसी पर भरोसा क्या करना प्यार मरता नहीं प्यार ...

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एक औरत की मोहब्बत

एक औरत की मोहब्बत आज लगता है औरत हर चिज के लिए बराबरी कतरे- कतरे खुद को ही हार चूकि ...

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तुम्हें पाने का ख्वाब

तुम्हें पाने का ख्वाब तुम्हें पाने का ख्वाब देख रहा हूं, यह हकीकत है या फसाना सोच रहा हूं। वर्षों ...

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नियति के आगे न किसी का चला है

नियति के आगे न किसी का चला है नियति के आगे न किसी का चला है न किसी का चलेगा। ...

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मेरी जिंदगी

मेरी जिंदगी मेरी जिंदगी अब डर नहीं मौत का अब जी लिया हूँ, तेरी हर सांस में। फिर वापस आ ...

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