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सफलता पाना है तो व्यवहार कुशल बनें

संजय कुमार सुमन 

Sk.suman379@gmail.com

जीवन में कभी-कभी आपको आक्रामक होना पड़ता है। इसका मतलब है आपमें भरपूर जोश हो, लेकिन जोश और जज्बा विवेक से दूर भी ले जाता है, इसलिए जरूरत पड़ने पर आक्रमक हों परंतु साथ में व्यवहार कुशल भी हों।सचमुच व्यवहार मनुष्य का वह अस्त्र है, जो पग-पग पर उसकी रक्षा करता है। मनुष्य की व्यवहार कुशलता ही दूसरे मनुष्य के हृदय पर कोई छाप छोड़ सकती है, जिसकी वजह से दूसरा व्यक्ति उसकी तरफ आकर्षित होता है। जिस प्रकार जब फुलवारी में गुलाब का फूल खिलता है, वह स्वयं कभी अपना बखान नहीं करता, बल्कि उसकी सुंदरता और उसकी महक उसका परिचय खुद-ब-खुद दे देती है। इसी प्रकार व्यवहार कुशल व्यक्ति की व्यवहार कुशलता ही उसका पूरा परिचय देती है। उसे अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने की जरूरत नहीं पड़ती।

कोसी टाइम्स

मुझको लगता है, इस महान ज्ञान के पथ पर बढ़ते हुए कोई व्यक्ति जब इस ज्ञान के व्यावहारिक पक्ष के प्रति जागरूक होता है, तब स्वत: ही उसके अंदर उस सुंदर ज्ञान की सुंदरता अपनी पूरी गुणवत्ता सहित प्रवाहित होने लगती है जो उसके हाव-भाव और आचार-विचार के माध्यम से परिलक्षित होने लगती है।

जब ज्ञान का सौंदर्य साधक के व्यावहारिक जीवन में उतरने लगता है, तो उसमें आया बदलाव, उसका प्रसन्न मुख-मंडल और उसकी यह व्यवहार कुशलता स्वत: ही उस अंदर ज्ञान का वास्तविक परिचय प्रदान कर देते हैं। उस व्यक्ति विशेष का यही परिचय दूसरों को भी प्रभावित कर सकता है।हमारी व्यवहार शिक्षा का प्रत्यक्ष प्रभाव हमारे चरित्र के सम्बन्ध में दूसरों पर पड़ता है। हमारा एक एक कार्य, रहन-सहन, वस्त्र, बोल-चाल का ढंग, उठने-बैठने तथा चलने की रीति निरन्तर हमारे चरित्र को प्रकट किया करता है। यदि हम तनिक भी असावधानी कर बैठते हैं, तो संसार में हमारे व्यवहार को लेकर टीका टिप्पणी होने लगती है। अच्छी से अच्छी योग्यता वाले व्यक्ति को अशिष्ट और असभ्य कह कर निकाल दिया जाता है। लोग उनसे बातें नहीं करना चाहते, कन्नी काटकर निकल जाते हैं। वे संसार में असफल होते हैं।

रोजमर्रा की जिंदगी में सभी लोग दूसरों से व्यवहार करते हैं। सभी का व्यवहार अलग-अलग तरह का होता है। मेरे एक पत्रकार मित्र कहते हैं कि अगर क्राइम की बढ़िया खबरें लानी हैं, तो बड़े पुलिस अधिकारियों के बजाय उनके ड्राइवर और वायरलैस ऑपरेटर ज्यादा काम आते हैं। सरकारी दफ्तरों में अक्सर लोग ‘साहब’ की नीयत और फितरत का पता ड्राइवर, चपरासी और सफाई कर्मचारी जैसे छोटे लोगों से लगाते हैं। इसके लिए वे ऐसे लोगों से अच्छे रिश्ते रखते हैं। पर इसमें तो स्वार्थ हो गया। बात फिर वहीं आ गई। स्वार्थवश किसी से अच्छा व्यवहार किया तो क्या बड़ी बात हुई?

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मेरे एक मित्र के पिता के दो सिनेमाघर हैं। बचपन में जब भी मैं उनके घर जाता था, तो उनकी शानो-शौकत देखकर चकित रह जाता था। सर्दियों में रविवार को वे अपने लॉन में एक बड़ी सी ईजी चेयर पर आराम से अधलेटे होकर धूप सेकते थे। वे उस दौरान गुड़ और मूंगफली खाते रहते थे। एक कटोरे में गुड़ की डलियां रखी होतीं और एक बड़ी सी टोकरी में मूंगफली। कभी-कभी एक परात में उबले हुए सिंघाड़े रखे होते। वे बच्चों को तो ये सब खिलाते ही, उनका जो भी नौकर काम पर आता या काम खत्म करके घर जाता, उसे भी खाने को यह सब देते। ड्राइवर, माली, सफाई करने वाला, दरबान, सबकी मुट्ठी में वे मूंगफली और गुड़ की डली जरूर रखते। उन्हें देखकर लगता ही नहीं था कि वे किसी में कोई भेदभाव करते हैं। इसीलिए सब उन्हें बहुत मानते थे।

व्यवहार करने में समझदारी और विनम्रता दोनों की आवश्यकता होती है। बिना समझदारी के हम अपने व्यवहार को सही अभिव्यक्ति नहीं  दे पाते हैं और विनम्रता के अभाव में व्यवहार की खूबसूरती उभर नहीं पाती है। अच्छे व्यवहार के माध्यम से व्यक्ति दूसरों को क्षण भर में प्रभावित कर सकता है और अपरिचित व अजनबियों को भी अपना सहयोगी बना सकता है। व्यवहार कुशलता में वह शक्ति निहित है, जिसके माध्यम से व्यक्ति कई लोगों के साथ प्रेम से रह सकता है, जीवन का आनन्द ले सकता है, अन्यथा इसके अभाव में पारिवारिक सदस्यों के बीच भी तालमेल व सामंजस्य निभा नहीं पाता है।
हम जो भी कार्य करते हैं, उसमें हमारा व्यवहार झलकता है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि हमें यह समझ हो कि हमें किन परिस्थितियों में किस तरह का व्यवहार करना चाहिए।

संजय कुमार सुमन

हमें स्वयं से प्रश्न करना चाहिए कि कहीं ऐसा तो नहीं कि हमारे व्यवहार में समझदारी व कर्तव्यशीलता की कमी है? केवल दिखावे के लिए किए गए व्यवहार अपनी उपयोगिता गंवा देते हैं और इससे किसी को लाभ नहीं मिलता। लेकिन यदि व्यवहार के साथ समझदारी का पुट है, कर्तव्यशीलता का संपुट है तो फिर इनके संयुग्म के साथ किया गया व्यवहार न केवल अपनी उपयोगिता को प्रमाणित करता है, अपितु किए जा रहे व्यवहार के उद्देश्य को भी पूरा करता है। आने वाली परिस्थितियों में हमें कैसा व्यवहार करना है यह निर्णय हमें ही लेना होता है। हमारा निर्णय व व्यवहार समस्याओं को सुलझा भी सकता है और उलझा भी सकता है और कभी-कभी अपनी जिद व अहंकार के वशीभूत होकर किया गया व्यवहार सामान्य-सी बात को बहुत बड़ा बना देता है। राई को पहाड़ की तरह बना देता है। इसलिए व्यवहार वही शोभा देता है, जिसमें विनम्रता हो, समझदारी हो और वह शुभभावना से अभिप्रेरित हो।

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आप क्यों जीते है? इस जीवन के बाद आपका क्या होगा?   हम चुनौती देतें है की आप अपने जीवन और भविष्य  के विषय में एक हफ्ता सोचें! मुझे विश्वास है कि जब हम अपने आप से यह सवाल पूछेंगे तो जरूर हमारा जवाब महत्वपूर्ण होगा। हम अपने आप को जब जवाब देंगे तो उस जवाब में एक अद्भुत बात हो सकती है और वह यह है कि हम खुद को गलत जवाब नहीं दे सकते। हम जब इस सवाल का जवाब देंगे तो वह किसी और को नहीं बल्कि अपने आप को देंगे और यह बात पूरी दुनिया जानती है कि हम अपने आप को कभी बेवकूफ़ नहीं बना सकते यानी अपने आप को कभी धोखा नहीं दे सकते। अगर आप भी जीवन में सफलता और लोकप्रियता अर्जित करना चाहते हैं, तो आपको अपने व्यक्तित्व में दूसरों के साथ अच्छे व्यवहार करने का गुण विकसित करना होगा। इस प्रकार आप व्यवहार कुशल बनकर जीवन में सफलता के सोपान चढ़ सकते हैं। पहली और बिल्कुल सच्ची बात है कि हम भले तो जग भला, असल में हम जैसा व्यवहार दूसरों से करते हैं वैसा ही वापस पाते हैं । यदि कोई ऐसा मानता है कि लोग बुरे हैं-संसार खराब है तो अपनी जिंदगी में वे अधिकांशतः ऐसे ही लोगों से मिलेंगे जो उनकी इस मान्यता को और सुदृढ़ कर देंगे यानि बुरे ही । इस प्रकार के लोग अच्छे इंसान में भी कोई न कोई बुराई ढूढ़ लेते हैं ।वहीं यदि आप लोगों के प्रति सकारात्मक व अच्छा नजरिया रखते हैं तो आपको वैसे ही लोग मिलेंगे यानि अच्छे ही और हो सकता है बुरे लोग भी अच्छे लगने लगें । यह बस अपने-अपने नजरिये की बात है। “जाकि रही भावना जैसी हम।“स्वयं अच्छा करें। दूसरों को समझाकर समय और ऊर्जा व्यर्थ करने में क्या लाभ ? कहने को तो बहुत कुछ होता है लेकिन करने से, ज्यादा अच्छा संदेश दूसरों को पहुँचता है। दोस्तों जीवन में सफल होना बहुत जरुरी है।

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सफलता पाने के लिए जीवन में अच्छे विचारों (Thoughts) का होना बहुत जरूरी है। यदि हमारे विचार अच्छे होगें तो अच्छे कार्यों से हमारा जीवन बदल जायेगा। इस पोस्ट में बताये गए विचारो को यदि आप अपने जीवन में अपनाओगे तो आप अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर लेंगे।हार कुशल मनुष्य की पहचान उसकी बोलचाल, रहन-सहन और उसके व्यवहार से होती है। मनुष्य अच्छा है या बुरा है, इसके लिए वह कोई सर्टिफिकेट लेकर नहीं घूमता, उसका व्यवहार ही उसके चरित्र का प्रमाण-पत्र है। सच कहूं तो विश्वविद्यालय की पढ़ाई के लिए सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ती है, लेकिन जीवन के विश्वविद्यालय में उसका व्यवहार ही प्रमाण-पत्र होता है। इसलिए जो व्यक्ति व्यवहार कुशल होता है, उसके पास जीवन का सबसे बड़ा प्रमाण-पत्र होता है और जो व्यक्ति व्यवहार कुशल नहीं है, जिसे कुछ भी पता नहीं हो कि हमें किससे कैसा व्यवहार करना चाहिए, बड़े-छोटों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए तो वह व्यक्ति मनुष्य दिखता जरूर है, लेकिन वह मनुष्य है ही नहीं। इसलिए जीवन में व्यवहार कुशल होना बहुत ही महत्वपूर्ण है।

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व्यवहार कुशल होना एक विज्ञान है, जीवन जीने की विधि है। इसे अभ्यास से सीखा जाता है। उदंड होने में कोई परेशानी नहीं होती। उदंड होना आसान है, सुशील, सज्जन और व्यवहार कुशल होना कठिन है। मां के गर्भ से न तो कोई व्यवहार कुशल होकर आता है और न ही कोई उदंड होकर। सभी लोग सामान्य स्थिति में ही पैदा होते हैं। जिनके घर का वातावरण सुंदर होता है, जिनके घरों में बड़े-छोटों को लिहाज किया जाता है, जिनके घरों में अनैतिक कार्य नहीं होते हैं, उनके ही घरों में बच्चे सुशील, सुंदर और अनुशासन प्रिय होते हैं। इसलिए बच्चों का चरित्र निर्माण बहुत कुछ उसके घर का वातावरण और दोस्तों की संगत पर निर्भर करता है। व्यवहार कुशल होना सफल जीवन का एक सुखद मार्ग है। जो व्यक्ति व्यवहार कुशल होता है, वह जीवन में कभी असफल नहीं होता, उसके जीवन में पग-पग पर सफलता मिलती रहती है। वह जहां कहीं भी जाता है, अपने व्यवहार से दूसरों को प्रभावित कर लेता है और उससे अपना काम निकाल लेता है। अगर आप किसी को सफल व्यक्ति मानते हैं तो भी मान लेना चाहिए कि निश्चित रूप से वह व्यक्ति दूसरों की अपेक्षा अधिक व्यवहार कुशल है और जो लोग असफल हैं, उनके संबंध में मान लेना चाहिए कि यह व्यक्ति आचरण और व्यवहार से उदंड हैं।मुझको लगता है, इस महान ज्ञान के पथ पर बढ़ते हुए कोई व्यक्ति जब इस ज्ञान के व्यावहारिक पक्ष के प्रति जागरूक होता है, तब स्वत: ही उसके अंदर उस सुंदर ज्ञान की सुंदरता अपनी पूरी गुणवत्ता सहित प्रवाहित होने लगती है जो उसके हाव-भाव और आचार-विचार के माध्यम से परिलक्षित होने लगती है।जब ज्ञान का सौंदर्य साधक के व्यावहारिक जीवन में उतरने लगता है, तो उसमें आया बदलाव, उसका प्रसन्न मुख-मंडल और उसकी यह व्यवहार कुशलता स्वत: ही उस अंदर ज्ञान का वास्तविक परिचय प्रदान कर देते हैं। उस व्यक्ति विशेष का यही परिचय दूसरों को भी प्रभावित कर सकता है।

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