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मधेपुरा : गुरु सूर्य के समान है तथा शिष्य चंद्रमा के समान – सुश्री कालंदी भारती

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रविकांत कुमार

कोसी टाइम्स @ मधेपुरा ।

“दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान” की ओर से मुरलीगंज में नौ दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ का अनुष्ठान किया गया है। कथा के द्वितीय दिवस में परम पूजनीय सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री कालिंदी भारती जी ने प्रथम स्कंध के अंतर्गत बताया कि राजा परीक्षित कलिकाल को रहने के लिए चार स्थान प्रदान करते हैं – जहां मदिरा का पान हो, परस्त्री संग हो, जुआ खेला जा रहा हो, हिंसा हो। इन चारों स्थानों पर कलिकाल का निवास है। साध्वी जी ने बताया कि अगर कोई एक बार ‘मदीरा’ अर्थात किसी भी प्रकार के नशे का सेवन कर लेता है अन्य अपने आप ही हो जाते हैं।
साध्वी जी ने आगे कहा कि आज समाज का हर वर्ग इस नशे के नागपाश में जकड़ चुका है। आर्थिक मंदी, बेरोजगारी, निरंतर तनाव व दबाव तथा पल-पल बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने आज युवा पीढ़ी को नशे के भयावह सम्राज्य का पथिक बना दिया है। स्वतंत्र देश का वासी होते हुए भी वह नशे की गिरफ्त में आकर पराधीनता का जीवन व्यतीत कर रहा है। जिस युवा के सहारे कोई देश स्वयं के लिए समुज्ज्वल भविष्य की किरणे देखता है आज वही युवा अपने देश के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह बनकर खड़ा हो गया है। असामाजिक तत्व तो पहले ही देश पर घात लगाकर बैठे हैं क्योंकि सारी दुनिया में से सबसे ज्यादा युवा भारत में ही हैं। नशीले पदार्थ घरों में सेंध लगाकर उनके हंसते-खेलते जीवन को लूट रहे हैं। जिसके परिणाम स्वरुप पारिवारिक और नैतिक मूल्य स्वार्थ परायणता की चिंता पर जलकर खाक हो रहे हैं।

नशों के व्यापार को संरक्षण देने वाले इस बात को समझ नहीं रहे हैं की चंद पैसों की खातिर वहां अपने ही देश को किस ग्रंथ में धकेल रहे हैं। भारत के हर एक शहर में अफीम, स्मैक, चरस, गांजा, कोकीन इत्यादि भेजने वाले सौदागर सक्रिय है। बड़े शहरों की दवाइयों की मंडियों में करोड़ों रुपए की नशीली दवाओं का कारोबार होता है। थोड़ी बहुत छापेमारी के बावजूद इस कारोबार पर रोक नहीं लगती है और नशे का यह दैत्य विकराल रूप धारण करता हुआ देश के युवा वर्ग को खोखला करता जा रहा है। देश के लगभग 73 मिलियन लोग नशे के आदी हो चुके हैं जिनमें से 24% की उम्र तो 18 साल से भी कम है। यह वह जुआ है शक्ति है जिसके आधार पर हम 2020 में विकसित राष्ट्र और 2045 तक विश्व की महाशक्ति बनने का स्वप्न देख रहे हैं, जो आज नशे की कटीली राहों पर भटक रही है। यौवन इस बात पर निर्भर करता है कि आपमे प्रगति करने की कितनी योग्यता है। हारे-थके मन से कोई युवा नहीं होता। यौवन तो वह है जो अपने महावेग से समस्याओं के गिरि शिखरों को काट दे वह विषमताओं के महा वट को उखाड़ दे। यदि किसी देश पर संकट के बादल छाए हैं तो युवा शौर्य ने ही प्रचंड प्रबंधन बनकर निदान किया है। साध्वी जी ने कहा कि समाज के प्रत्येक समस्या मन के स्तर पर जन्म लेती है और इसका समाधान भी मन के स्तर पर ही होना चाहिए। जब तक मानव मन को नियंत्रित करने की पद्धति नहीं प्रदान की जाती तब तक समाज में भयानक कुरीतियां वह व्याधियां जन्म लेती रहती हैं। इस मन को काबू में करने हेतु ब्रह्म ज्ञान की नितांत आवश्यकता है। जिससे विवेक शक्ति जागृत होती है। फिर भी व्यक्ति मन में उठती दुर्भावनाओं व वासनाओं पर नियंत्रण रख सकता है। नशा उपचार हेतु सरकारी, गैर सरकारी संगठनों द्वारा उपचार साधन या पद्धति लागू हो चुकी है लेकिन यह कितनी कारगर सिद्ध हो रही है यह किसी से भी नहीं छिपा है। भारत का ड्रग रिकॉर्ड कहता है कि उपचार के बावजूद भी 80% नशाखोर फिर से नशा करने लगते हैं। उपचार प्रक्रिया से गुजरने के बाद उनका शरीर नशा मुक्त हो जाता है और नशे की लत दिमाग से नहीं निकल पाती। इन पद्धतियों के बारे में जितनी भी जानकारियां उपलब्ध हुई है, अमोघ नहीं कहीं जा सकती है उनके विषय में व्यवस्थित वह उचित खोज अभी शेष है। समाज में फायदे नशे की समस्या पर रोक लगाने के लिए तथा जन-मानस का सही मार्गदर्शन करने के लिए संस्थान के संस्थापक व संचालक सर्व श्री आशुतोष महाराज जी ने “बोद्ध” नामक नशा उन्मूलन कार्यक्रम की स्थापना की, जिसके अंतर्गत विज्ञान की पद्धति के द्वारा हजारों की संख्या में लोग नशा मुक्त हो चुके हैं। सुश्री कालिंदी भारती जी ने ध्रुव प्रसंग का व्याख्यान करते हुए साध्वी जी ने बताया कि ध्रुव की अभी बाल्यावस्था है, लेकिन वह प्रभु से मिलने की उत्कंठा लिए वन में जाकर तपस्या करना शुरु कर देता है। जहां पर उसकी भेंट नारद जी से होती है जो उसको ब्रह्म ज्ञान प्रदान कर घट के भीतर ही ईश्वर के प्रत्यक्ष दर्शन करवा देते हैं। आज मानव भी प्रभु से मिलने के लिए तत्पर हैं लेकिन उसके पास प्रभु प्राप्ति का कोई साधन नहीं है। हमारे समस्त वेद-शास्त्रों व धार्मिक ग्रंथों में यही लिखा है कि ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति के लिए केवल गुरु की शरणागति होना पड़ता है। गुरु ही शिष्य के अज्ञान तिमिर को दूर कर उसमें ज्ञान रूपी प्रकाश को उजागर कर देता है। उन्होंने कहा कि जब भी एक जीव परमात्मा की खोज में निकला है तो वह सीधे परमात्मा को प्रपन्न नहीं कर पाया। गुरु ही है जो जीव और परमात्मा के मध्य एक सेतु का कार्य करता है। परमात्मा जो अमृत का सागर है किंतु मानव उस अमृत पान से सदा वंचित रह जाता है। पिपासु मनुष्य तक मेघ बनकर जो अमृत की धारा पहुंचाता है वह सद्गुरु है। सद्गुरु से संबंध हुए बिना ज्ञान नहीं हो सकता। गुरु इस संसार सागर से पार उतारने वाले हैं और उनका दिया हुआ ज्ञान नौका के समान बताया गया है। मनुष्य उस ज्ञान को पाकर भवसागर से पार और कृत्य कृत्य हो जाता है। सुश्री साध्वी कालिंदी भारती जी ने कहा कि अगर आप भी उस परमात्मा को जानना चाहते हैं तो आपको भी ऐसा ही मार्गदर्शक चाहिए। यह तो सर्वविदित है कि सूर्य प्रकाशमय तत्व है और चंद्रमा की प्रकाशमय है, किंतु चंद्रमा का अपना कोई प्रकाश नहीं है। जब सूर्य सुबह प्रकाशित होता है तब उसी के ही प्रकाश से ही चंद्रमा तपता रहता है और रात को वही ताप शीतल होकर शीतलता प्रदान करता है। ऐसे ही गुरु भी सूर्य के समान है तथा शिष्य एक चंद्रमा के समान। गुरु रूपी सूर्य के प्रकाश में तप कर ही शिष्य दुनिया को शीतलता प्रदान करने वाला ज्ञान को आगे फैलाता है। कबीर जी को प्रकाशित करने वाले सूर्य रूपी गुरु रामानंद जी थे, नरेंद्र को विवेकानंद बनाने वाले श्रेष्ठ गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी थे, शिवाजी मराठा के अपरिमित बल के पीछे समर्थ गुरु रामदास जी की असीम शक्ति व प्रेरणा कार्यरत थी। अतः गुरु के बिना हम भी उस परमात्मा तक कदापि नहीं पहुंच सकते।

कथा व्यास सुश्री कालिंदी भारती जी के अलावे स्वामी श्री कुलविंदर जी, गुरुभाई श्री सुनील जी, गुरुभाई श्री अमृत जी, स्वामी श्री विनयानंद जी, साध्वी सुश्री सर्वसुखी भारती, सुश्री किरण भारती, पूर्णिमा भारती, ममतामयी भारती जी ने भजनों में अपने मधुर कंठ से आवाज दिया एवं सुश्री हरिप्रीता भारती जी ने वायलिन, सुश्री हरिअर्चणा भारती जी ने सेंथसाइजर से, सुश्री निवृत्ति भारती जी ने सितार, तथा नीलम भारती जी ने बाँसुरी आदि की सुमधुर धुनों से भजनों को और भी मधुरित कर दिया एवं स्वामी श्री कुलवीरानंद जी ने तबला गुरुभाई सचिन जी ने ढोलक एवं गुरुभाई दलजीत जी ने अक्टोपेड आदि से ताल दिया।

मौके पर मुख्य जजमान युवा व्यवसायी शेखर कम्पनी के निदेशक शेखर कुमार यादव ने कहा कि युवाओं को भी आध्यत्म से जुड़ना चाहिए ,क्योंकि आध्यत्म में वो शक्ति है कि आप स्वयं सही और गलत का फैशला कर सकते है। उन्होंने कहा कि मैं भी युवा अवस्था से ही आध्यत्म से जुड़ा हुआ हूँ। अध्यात्म के बल पर ही मैंने जीरो से शुरुआत किया संघर्ष के दिनों में मैं विचलित हो जाता था किंतु आध्यत्म एक ऐसी शक्ति है कि आपको विन्रम बना देता है, अहंकार आपके आसपास भटक भी नही सकता है और कामयाबी आपकी कदम चूमती है। आध्यत्म के बल पर ही आज लोग मुझे शेखर कम्पनी के नाम से जानते है।

आज की पावन आरती में जिन अतिथियों ने भाग लिया वह है श्री दिनेश कुमार जूनियर वारंट ऑफीसर, श्री मनोज जयसवाल उर्फ मुन्ना जी एवं श्रीमती बिंदु देवी मां दुर्गा ट्रेडर्स दिवरा बाजार पूर्णिया, श्री राजेश खेतान जी एवं श्रीमती बबीता देवी सिंघेश्वर मधेपुरा ।

मुख्य यजमान डॉक्टर प्रोफेसर डीएन चौरसिया एवं श्रीमती राजकुमारी चौरसिया शाहपुर पटोरी समस्तीपुर, श्री शेखर यादव शेखर कंपनी मुरलीगंज, श्री अमित कुमार प्रबंधक बैंक ऑफ इंडिया मुरलीगंज, श्री निखिल अग्रवाल सी ए मुरलीगंज । चेम्बर्स ऑफ़ कॉमर्स अध्यक्ष ब्रह्मानंद जयसवाल ,राजद जिलाध्यक्ष देवकिशोर यादव, प्रखंड अध्यक्ष रुद्रनारायण यादव, विजय यादव, उदय चौधरी, रमेश अग्रवाल, पूर्व प्रचार्य डॉ जनार्दन यादव, श्यामलाल सोनी, इंद्रचंद बोथरा, विनोद वफना, राहुल मिश्रा सहित अन्य सैकड़ो लोग मौजूद थे ।

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