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मधेपुरा:मिट्टी के दीये से सज गया बाजार,नही मिल रहे खरीददार

संजय कुमार सुमन

समाचार संपादक@कोसी टाइम्स

आधुनिकता की दौड़ ने कुम्हारों का व्यवसाय चौपट कर दिया है। दीपावली के लिए पिछले दो महीने से कड़ी मेहनत से मिट्टी के दीये व दीपावली के अवसर पर अन्य वस्तुएं तैयार किए जाने के बाद कुम्हारों को अपने उत्पाद के खरीददार नहीं मिल पा रहे हैं। मिट्टी की सौंधी खुशबू से तैयार मिट्टी के बरतन को खरीददार कम ही मिल रहे हैं। मधेपुरा जिले के विभिन्न स्थानों पर सैकड़ों कुम्हार परिवारों ने बड़ी उम्मीदों के साथ प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी मिट्टी के दीये दीपावली के लिए दो महीने की मेहनत के बाद तैयार किए थे, परंतु  कुम्हारों को ग्राहक नहीं मिल रहे हैं। दीपावली के लिए प्रतिवर्ष दो महीने की कड़ी मेहनत यहां के कुम्हार करते हैं। इसके लिए आकर्षक रूप से दीयों को रंग-बिरंगे तरीके से तैयार किया जाता है बावजूद इसके मोमबत्ती के रंग-बिरंगे दीये कुम्हारों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

सुबोध पण्डित,रामलाल पण्डित,रूपलाल पण्डित ने बताया कि पिछले 15 दिनों से उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है। मिट्टी के दीये मोम के दीयों से कहीं सस्ते हैं। यहां तक कि मिट्टी के छोटे-छोटे दीये 20 रुपए में 25 दीये बेचे जा रहे हैं। बावजूद इसके ग्राहक खरीदने को तैयार नहीं हैं। अब उन्हें शेष तीन दिनों में एक उम्मीद की किरण जगी है कि शायद दीपों के इस त्योहार में मिट्टी के दीये लोगों को पसंद आएंगे।

कुम्हारों का कहना है कि दीये और मिट्टी के अन्य सामानों के पर्याप्त मात्रा में बिक्री नहीं होने से आर्थिक रूप से जूझ रहे हैं और स्वयं अपने घरों को रोशन करने से वंचित रह जाते हैं। इसी कारण कुम्हारों की जिन्दगी में दिन प्रतिदिन अंधेरा घिरता जा रहा है। वह अपनी इस पुश्तैनी समृद्ध कला एवं व्यवसाय से विमुख हो रहे हैं। शहर के  विभिन्न क्षेत्रों में कुछ वर्षों पहले करीब 500 परिवार इस व्यवसाय से जुड़े थे जो घटकर करीब 150-200 परिवार ही कुम्हारी का काम करते हैं।

कहना है कि महंगाई के कारण बच्चों को तालीम नहीं दे पा रहे हैं। उन्होने बताया कि जो आय होती है उसमें परिवार का ही भरण नहीं हो पाता है तो इन्हे शिक्षा कहां से देंगे। शिक्षा भी अब केवल व्यवसाय बन कर रह गयी है। जितना अच्छा स्कूल उतनी मोटी फीस। तालीम के अभाव में ज्ञान का अंधेरा और आर्थिक मंदी से विपन्नता ने घेरा है।

उन्होंने बताया कि मिट्टी के दीप अब लोगों की आंखों में चमक नहीं पैदा कर पाते। उन्हें चाइनीज सस्ती दीये, मोमबत्ती और बिजली के टिमटिमाते झालरों की रोशनी रास आ रही है। दीप पर्व के मद्देनजर चाक डोलाने वाले कुम्हार पूंजी डूबने की आशंका में भी अधिक तैयारी नहीं किये हैं।

मंहगाई ने हर चीजों के दाम बढ़ा दिये लेकिन उपभोक्ता सस्ते मूल्यों पर ही मिट्टी के बने सामानों को खरीदना चाहता है जो संभव नहीं होता। पिछले वर्ष मिट्टी जो 1000-1500 रूपये ट्राली थी बढ़कर 2000 से 2500 रूपये ट्राली हो गयी है। कुम्हार दिन-रात एक कर मिट्टी इकट्ठा करता है। फिर इसमें से ईंट, कंकरीट के टुकड़ों को अलग कर इसे चिकना बनाता है। तब इस मिट्टी से नाना प्रकार के खिलौने, दीपक, गुल्लक आदि बनाता है।

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कच्चे माल को पकाने में उपयोग आने वाली लकड़ी, लकड़ी के बुरादे, उपले सभी के मूल्यों में भारी इजाफा होने के कारण कुम्हारों को उनकी लागत निकालनी मुश्किल पड़ रही है। उपभोक्ता शगुन के लिए मिट्टी के दीपक खरीदते हैं, शेष चाइनीज के सस्ते छालर, मोमबत्ती और दीपक से काम चलाते हैं।

बहुत मेहनत से बनाए जाते हैं दीये

मिट्टी के दीये तैयार करने में मिट्टी के साथ-साथ ईंधन में भी भारी खर्च आता है। इसके अलावा पूरा परिवार दिन रात मिट्टी के दीये तैयार करने में मेहनत करता है। पहले मिट्टी के बरतनों को आग में पकाया जाता है तथा फिर उन्हें आकर्षक रूप प्रदान करने के लिए कुम्हारों का पूरा परिवार उनमें रंग भरता है। फिर भी लोग उनकी इस मेहनत की ओर आकर्षित नहीं हो रहे हैं।

चाक के आविष्कार ने दुनिया को सभ्यता का पाठ पढ़ाया। यदि चाक का आविष्कार नहीं हुआ होता तो आज हमारे पास इतना समृद्ध भौतिक विज्ञान और न गणित तथा ज्यामिति नहीं होती ।

उन्होंने कहा कि मिट्टी का दिया मिट्टी से बने मनुष्य शरीर का प्रतीक है। उसमें रहने वाला तेल उसकी जीवन शैली का प्रतीक है। दीपक हमें अंधकार दूर कर समाज में प्रकाश फैलाने की सीख देता है। दीपक की लौ केवल रोशनी की प्रतीक नहीं है बल्कि वह अज्ञानता से अंधकार को मिटाकर ज्ञान के प्रकाश से जीवन को रोशन करने की प्रेरणा देता है।

कहा कि यह विण्डबना नहीं तो और क्या है कि दीपावली के अवसर पर दूसरों के घर ज्ञान का दीपक और समृद्धी का प्रकाश फैलाने वाले कुम्हारों के घर अज्ञानता और विपन्नता का अंधेरा कायम रहता है। उन्होंने कबीर दास के दोहे “माटी कहे कुम्हार से, तु क्या रौंदे मोय। एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौदूंगी तोय” में जीवन की पूरी सच्चाई बयां कर दी।

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