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रुपया के कमजोर होने के पीछे हम भी जिम्मेवार है

डॉ हर्ष सिन्धु

आपकी बात @ कोसी टाइम्स .

अगर बगल में भी जाना हो तो फटफटिया लिए दौड़ पड़ते हैं, सब्जी भी लानी हो तो सेल्फ का स्विच दबाते हैं और फुर्र हो जाते हैं,कोई मित्र कहे पान खाने जाना है तो बस अपने पीछे बैठाते हैं और शान से पान दुकान पर जाते हैं और उधर से मोटरसायकिल पर बैठकर पीचते हुए चले आते हैं।हम यह नहीं सोचते कि पेट्रोल-डीजल की अनावश्यक खपत हमारे देश की अर्थव्यवस्था के लिए कितनी खतरनाक है।आफिस जाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बदले कार का ही प्रयोग करेंगे क्योंकि देह के मान से बढ़कर हमारा सम्मान जरूरी है।खैर इसके लिए सरकार भी कम जिम्मेदार नहीं है।

सरकार ने तो पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने के लिए जो भी कदम उठाया है वह नाकाफी है,शायद चढ़ावा मिलता होगा प्राइवेट ट्रांसपोर्टर से।सरकार को यह नियम बनाना चाहिए कि बिना आपात स्थिति के तब तक कोई भी कार का प्रयोग नहीं कर सकता जबतक कि उसमें चार सवारी न हों ।इसके कई फायदे होंगे-एक तो तेल की खपत कम होगी,दूसरा प्रदूषण कम होगा।इस तरह लोग आफिस जाने के लिए भी कार की सवारी तो कर पायेंगें लेकिन कार साझा करके।हाँ एक और बात हम भारतीयों को देशी चीजें पसंद ही नहीं आती चाहे वो टी शर्ट हो ,चाहे पतलून , या चाहे सूट हो।यहां तक कि बीबी भी इटली वाली ही चाहिए।भाइयों हमें विदेशी सामानों का उपभोग करने के बदले बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है।आयातित सामानों की खरीददारी डॉलर में जिससे उसकी मांग बढ़ जाती है और हमारा विदेशी मुद्रा भंडार घट जाता है जिसके कारण रुपया को अर्थव्यवस्था के अखाड़ा में पटकनिया पर पटकनिया खाना पड़ता है और हम मूकदर्शक बने देखते रहते हैं।

सरकार को चाहिए कि हमारे देश में सस्ते दर पर उत्कृष्ट कोटि की शिक्षा उपलब्ध हों जिससे विद्यार्थियों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए विदेश न जाना पड़े,इसका लाभ यह होगा कि हमें डॉलर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी।साथ ही विदेश पढ़ाई करने जाने वालों के लिए कड़े नियम बनाये जाने चाहिए,जिससे सिर्फ मेधावी बच्चे विदेश जाएं न कि धनसेठ के बच्चे।अमीर तो अपने बच्चों को विदेश में पढ़ा लेते हैं मगर इसका खामियाजा गरीब जनता को भुगतना पड़ता है।इसके साथ ही ऐसे सामानों का निर्माण हो जिसका निर्यात हम अधिक से अधिक कर सकें।इसके साथ ही कृषि और कृषकों को सुदृढ़ किये बिना हम हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत नहीं कर सकते हैं।

हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम खाद्यान्न पर स्वनिर्भर हों एवं हम खाद्यान्न का अधिक से अधिक निर्यात करें और कम से कम आयात।कपड़ा उद्योग,मसाला उद्योग एवं तकनीकी उद्योग को मजबूत करके ही हम अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं।हाँ बहुत लोग ट्रैन में मुफ्त सफर करके सोचते हैं उसने बहुत बड़ा काम कर लिया।ट्रैन भी डीज़ल से चलती है और डीजल हमें आयात करने पड़ता है ,हमारे मुफ्त सफर करने के कारण देश का व्यापार घाटा बढ़ता है जिसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है और अंततः हम पर।देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जनसंख्या नियंत्रण भी काफी जरूरी है।सरकार को जल्द ही इस पर कोई ठोस कानून बनाना चाहिए।

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