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साहित्य में आज पढ़िए ट्विंकल की रचना, तू जीवित शक्तिशाली नारी हैं…..

तू डर के मत रह,
तू मुँह बंद कर के न सह
मत बन अबला कि तेरी पहचान भारी हैं,
तू केवल हाड़-माँस का टुकड़ा नहीं हैं,
हैं तुझमें दुर्गा का वास
तू जीवित एक नारी हैं…

तू भीख अत्फ़(दया) की मत माँग,
तू आत्मसम्मान की नींव गाड़
मत रख आस कि तू ही हैं जननी,
तेरे बिना खुद ये धड़ा अधूरी हैं,
तू केवल हाड़-माँस का टुकड़ा नहीं हैं,
हैं तुझमें काली का वास
तू जीवित एक नारी हैं…

तू रक्षा की पुकार न लगा,
तू न्याय की गुहार न लगा,
मत रख इशि़तयाक़(चाह) औरों से, कि तू स्वंय प्रबल बान हैं,
कि उठ अब कर संहार,कि अत्याचार की सीमा सबने लाँघी हैं,

तू ही हैं जगदंबा,महाकाली तू,नवदुर्गा तुझमें ही समाई हैं
तू केवल हाड़-माँस का टुकड़ा नहीं हैं,
तू जीवित शक्तिशाली नारी हैं…

 

 

लेखिका परिचय

नाम: ट्विंकल कर्मकार
बी. कॉम,बाबा साहब भीम राव 
अम्बेडकर यूनिवर्सिटी(मुज़्ज़फ़रपुर) ,बिहार.

 

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