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तुम कहो तो आज आसमाँ पे कहानियाँ लिख दूँ……साहित्य में आज पढ़िए सलिल सरोज जी को

तुम कहो तो आज आसमाँ पे कहानियाँ लिख दूँ
तुम्हारे हुश्न की मस्ती,अपनी जवानियाँ लिख दूँ

तेरे छलकते हुए मदहोश हुश्न का बीमार हूँ मैं
इस नाचीज़ दिल की सारी ही परेशानियाँ लिख दूँ

क्या कर सकेगा बराबरी चाँद तुम्हारे शिकन का भी
इन बादलों के जिस्म पे तुम्हारी मनमानियाँ लिख दूँ

वो कोई और होंगे जिन्हें तुम्हारे अदाओं की कद्र नहीं
मैं दो जहाँ तक तुम्हारी तारीफें मुँह ज़ुबानियाँ लिख दूँ

मैं बहका नहीं हूँ पर बाकायदा होश में भी नहीं
तेरे रूप की चोरी करते अपने दिल की बेइमानियाँ लिख दूँ

 

 

लेखक

सलिल सरोज

सीनियर ऑडिटर ,नई दिल्ली

मूल रूप से बेगुसराय ,बिहार के रहने वाले है .

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