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साहित्य”हिन्दी” 

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हिन्दी 

सनन- सनन बहे पवन

कहे कथन सुनो वचन ।

यह जगती यह सागर

यह पृथ्वी यह अम्बर ।

सब सजीव सब प्र जीव

सब अमीर सब गरीब ।

गरीब के लिए इमेज परिणाम

सभी देश सभी काल

सभी वेष सभी गाल ।

सब इच्छा सब आशा

सब दीक्षा सब भाषा ।

सभी गीत सभी ताल

सभी मीत सभी लाल ।

यह जाने यह माने

यह हिन्दी यह बिन्दी ।

बिंदी के लिए इमेज परिणाम

कपाल पर ललाट पर

चमक रही दमक रही ।

सिखा रही चला रही

बता रही सुना रही ।

हे अभिनव

हे प्राणी

हे मानव

हे ज्ञानी ।

मुझे बोल मुझे बाँच

मुझे तोल मुझे जाँच ।

मैं वाणी भाषण की

शासन के लिए इमेज परिणाम

मैं भाषा शासन की ।
बड़ी मधुर बड़ी सरल

बड़ी सुघर बड़ी तरल ।

सबके मन सबके मुख

सभी जिह्वा सभी ओष्ठ

सभी तालू सभी दंत ।

रही बोल रही डोल रही

झूल रही खेल ।

हाँ मुझको पढ़ ले

तू हाँ मुझको गढ ले तू ।

फिर बता कर चिन्तन ।

संजय ‘विजित्वर’

हाजीपुर,पटना 

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