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बज्जिका गीत-“हे बूढी”

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हे बूढी

हे बूढी

घर में के बरतन बजइछऔ दाल,

चाउर अपने चलइछऔ ॥

कथी करबऽ तू कुच्छो न बुझाइछऔ

कथी करबऽ तू कुच्छो न सुझइछऔ

बूढी के लिए इमेज परिणाम

हे बूढी

घर में के बरतन नचइछऔ॥

दाल ,चाउर अपने चलइछऔ ॥

चुप्पे तू बईठ के तमासा देखइछऽ

चुप्पे तू बईठ के पासा फेंकइछऽ

बूढी के लिए इमेज परिणाम

हे बूढी

घर में के बरतन भगइछऔ

दाल ,चाउर अपने चलइछऔ ॥

इ दुनिया के नाया रिबाज हई

इ दुनिया के नाया मिजाज हई

हे बूढी

घर में के बरतन करइछऔ

दाल ,चाउर अपने चलइछऔ ॥

देखें वीडियो 

संजय ‘विजित्वर’

हाजीपुर,पटना 

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