Home » Recent (Slider) » विश्वविद्यालय के हर दमनकारी नीतियों का पुरजोर विरोध करेंगे : रंजन

विश्वविद्यालय के हर दमनकारी नीतियों का पुरजोर विरोध करेंगे : रंजन

रंजन यादव

आपकी बात @ कोसी टाइम्स.

बीएन मंडल विश्वविद्यालय क्या लाठी डंडे से चलेगी ? क्या सच में कैम्पस को फ़ौज के हवाले करने की नौबत आ गई है ? क्या छात्रों को यहाँ गाली देने की शिक्षा दी जाएगी ? यह सवाल आज मधेपुरा के छात्रों, अविभावकों और बुद्धिजीवियों के सामने है. बीएन मंडल विश्वविद्यालय में जो 8 अगस्त को हुवा वह विश्वविद्यालय के इतिहास में सबसे सर्वनाक घटना है. लेकिन यह घटना हुई क्यों ? इसे भी जानना जरुरी है.

8 अगस्त को बीएन मंडल विश्वविद्यालय के बंद कमरे में चोरी-छिपे बहाली की प्रक्रिया की जा रही थी. इस बहाली की जानकारी आम लोगों को नहीं थी. यह बहाली सिर्फ अपने सगे-सम्बन्धी और विश्वविद्यालय के दलालों के लिए थी. परिसर की भीड़ के बाद छात्र संगठनों को इस बात का पता चला. कई लोग आपत्ति किये जिसके बाद निर्वाचित छात्र संघ के कई प्रतिनिधि एक स्मारपत्र सौपने प्रतिकुलपति के पास गए थे. छात्रों ने बहाली में गड़बड़ी का भी आरोप लगाया. जिसपर अधिकारी विफर गए. कुलसचिव ने तो गाली देकर धक्का देते हुए बाहर जाने को कहा, छात्र लोग नए कुलसचिव को पहचान भी नहीं रहे थे. जब छात्र प्रतिनिधि बोले हम प्रतिकुलपति से बात करने आए है. फिर कुलसचिव और प्रतिकुलपति अपने गुर्गों के साथ मिलकर 4 छात्र नेताओं को भीतर कमरे में बंद कर पीटना शुरू कर दिया जैसे ही इस बात की जानकारी बाहर गई छात्र उग्र हो गए और दोनों तरफ से मारपीट होने लगी. किसको कितना चोट आया यह कोई नहीं जानता.

क्या विश्वविद्यालय में कोई आपत्ति करना गुनाह हो गया है ? विश्वविद्यालय के कुलसचिव नीरज कुमार जी सेना के कर्नल रहे हैं अब विश्वविद्यालय की प्रशासन कुलसचिव के रूप में चला रहे हैं. वे विश्वविद्यालय में सेना को बुलाने की बात करते हैं. वह कहते हैं कर्मचारी भले कलम न रखे लाठी जरुर रखे. यदि वे लाठी नहीं रखते हैं तो उसका वेतन काट लिया जाएगा. उनका कहना है कि कैम्पस में कोई छात्र अधिक बोले तो उसे पीटने कीआजादी सभी कर्मचारी को है. सरस्वती के इस मंदिर में कुलसचिव, प्रतिकुलपति द्वारा गाली-गलोज करना और सभी कर्मचारियों के हाथों में लाठी देकर छात्रों को पिटवाना कितना उचित है. आज मधेपुरा के लोगों को सोचना होगा. मधेपुरा के तमाम छात्र संगठन विश्वविद्यालय में घटी इस घटना की निंदा करती है. लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन के मनमाने रबैये पर भी हमें घोर आपत्ति है.

हम बताना चाहते हैं- कर्नल साहब ,यह विश्वविद्यालय है, भारत पाकिस्तान या चीन की सीमा नहीं, ना ही कोई रणक्षेत्र जो आप सेना को बुला लें. यहाँ छात्र रहते हैं, यहाँ कलम-किताब की बात होती है, यहाँ कोई आतंकवादी, देशद्रोही नहीं है. यहाँ लाठी गोली की बात हो. हम छात्र छात्र हीत के लिए लड़ते हैं, मांग उठाते हैं. यदि उसकी हितों और मांगों को लाठी गोली से दबाने का प्रयास किया जाएगा तो विश्वविद्यालय प्रशासन यह समझ लें हम डरने वाले नहीं है. उनकी हर दमनकारी नीतियों का पुरजोर विरोध करेंगे. कुलसचिव और प्रतिकुलपति को अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगनी चाहिए.

 

रंजन यादव छात्र नेता है और अभाविप से जुड़े हुए है।ये उनके निजी विचार है।

Comments

comments

x

Check Also

आज डूबते व कल उगते सूर्य को देंगे अर्घ्य, छठ पर्व पर मधेपुरावासियों में भारी उत्साह

संजय कुमार सुमन  कोसी टाइम्स@मधेपुरा  मधेपुरा जिले के विभिन्न क्षेत्रों  में छठ पर्व की छटा बिखरी हुई है। सूर्योपासना के ...