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साहित्य”सावन की घटा”

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सावन की घटा

सावन की घटा जब बरसती है,

मन में गुदगुदी सी होती है,

यादों के झरोखों से तब तुम,

धीरे से नीचे उतरते हो।

कोसी टाइम्स

याद आता मुझे वह सुहाना पल,

जब साथ साथ हम होते थे,

बांहों में बांहें डाल सनम,

जीवन के सपने बुनते थे।

याद आती वे सुहानी घड़ियां,

कैसे बरसती थी बदलियां,

तब तुम मिलने को आते थे,

हम छातों में सिमट जाते थे।

कोसी टाइम्स

कोठे पे तुम्हारा आ जाना,

कोने में खड़ा हो छुप जाना,

तब मेरी खिड़की खुलती थी,

नजरों से नजरें मिलती थी।

तुम रूठे क्या जीवन रूठा,

जैसे सारा सावन रूठा,

सारे सपने बस सिमट गये,

मानो जैसे तालाबन्द हुए।

सावन बिन रूह तड़पती है,

सांसें भी मेरी अटकती है,

जीवन में जब पानी न रहा,

जीने का फिर तो क्या है मजा।

कोसी टाइम्स

सावन की घटा जब बरसती है,

मन में गुदगुदी सी होती है,

यादों के झरोखों से तब तुम,

धीरे से नीचे उतरते हो।

डाॅ0 सुधा सिन्हा

पटना

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