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हम चौकीदार भी हैं, भागीदार भी, लेकिन आपकी तरह सौदागर और ठेकेदार नहीं-पीएम मोदी

संजय कुमार सुमन
समाचार संपादक-कोसी टाइम्स

चार साल में पहली बार मोदी सरकार के सामने अग्नि परीक्षा है।संसद के मॉनसून सत्र के तीसरे दिन ही मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस जारी है।
नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। अपने भाषण की शुरुआत करते ही राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा हर नागरिक के खाते में 15 लाख रुपये डालने का वादा याद दिलाया।राहुल गांधी ने बीजेपी की सरकार को जुमले वाली सरकार करार दिया। राहुल गांधी ने कहा कि हिंदुस्तान के युवाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विश्वास नहीं है।फिर क्या था वो पीएम मोदी के पास गए और उन्हें गले लगा लिया।

बीजेपी पर जमकर बरसे राहुल

राहुल गांधी द्वारा भाषण में पीएम मोदी और रक्षा मंत्री पर लगाए गए आरोपों के चलते बीजेपी सांसदों ने सदन में जमकर हंगामा किया और उनके आरोपों पर विरोध जताया। सदन में भारी हंगामे के चलते लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 1.45 बजे तक स्थगित कर दिया, जिसके बाद सदन की कार्यवाही दोपहर 1.45 बजे शुरू हुई।सदन की कार्यवाही शुरू करने से पहले सुमित्रा महाजन ने कहा कि मैं चाहती हूं कि डिबेट अच्छी तरह से हो जाए।

महिलाओं के साथ बढ़ते बालात्कार के मामलों से लेकर देश में लगातार बढ़ रही मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर राहुल ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया।कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने उनसे कहा है कि राफेल जेट विमान पर भारत के साथ उनका कोई भी गोपनीय समझौता नहीं हुआ है। राहुल गांधी के इस बयान पर फ्रांस ने झटका देते हुए कहा है कि राहुल के आरोपों को खारिज कर दिया है। फ्रांस सरकार का कहना है कि दोनों देशों में सूचना गोपनीय रखने का करार है और इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है।  बयान में कहा गया है कि 9 मार्च 2018 को एक टीवी चैनल को दिए गए फ्रांस के राष्ट्रपति के इंटरव्यू में साफ कहा था कि यह समझौता काफी गोपनीय है और इसके डिटेल का खुलासा नहीं किया जा सकता है।


राहुल गांधी ने आज लोकसभा में सत्ता पक्ष पर जोरदार हमला करते हुए कहा,  मैंने व्यक्तिगत तौर पर फ्रांस के राष्ट्रपति से मुलाकात की और उनसे पूछा कि क्या भारत के साथ कोई गोपनीय समझौता हुआ है। उन्होंने मुझसे कहा कि ऐसा कोई भी गोपनीय समझौता दोनों देश के बीच नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा कहना में कोई हिचक नहीं है और मैं ऐसा देश को बता सकता हूं।

केंद्र सरकार पर राहुल के इस हमले का राजनाथ सिंह ने जवाब दिया।

लोकसभा में अपने भाषण के दौरान मॉब लिचिंग के बारे में बात करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि देश में हो रही मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए हम सब कुछ करेंगे। मैंनें कई राज्यों से इस बारे में बात की है और ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वालों को कड़ी से कड़ी सज़ा देने के लिए कहा है। मैं राज्य सरकारों से इस संबंध में सख़्त क़ानून बनाने की मांग करता हूं।

राजनाथ ने कहा कि मॉब लिंचिंग की घटनाएं दुखद हैं, लेकिन वो लोग जो इस मुद्दे को बढ़ा चढ़ाकर पेश कर रहे हैं उन लोगों को मैं बताना चाहता हूं कि मॉब लिंचिंग की सबसे बड़ी घटना तो 1984 में सिख विरोधी दगों के दौरान हुई थी। सदन की गरिमा को लेकर स्पीकर सुमित्रा महाजन ने नाराज़गी व्यक्त करते हुए सलाह दी कि गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं गले लगाने के विरूद्ध नहीं हूं लेकिन प्रधानमंत्री पद का सम्मान करना चाहिए। हमारे सदन का सम्मान हमें ही करना होगा।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि राहुल गांधी सीधे आरोप नहीं लगा सकते। अगर आप किसी पर आरोप लगाते हैं तो पक्के सबूत होने चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति या मंत्री पर अगर आरोप लगाते हैं तो उस मंत्री को भी अपने बचाव में बात रखने का मौक़ा मिलना चाहिए।

संसद में शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान लोजपा नेता रामविलास पासवान ने कहा कि एससी-एसटी एक्ट में उन्हें बदलाव मंज़ूर नहीं है। रामविलास पासवान ने अपने भाषण में कहा कि जजों की नियुक्ति में दलितों को आरक्षण मिले।
एम्स पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि देशभर में 20 एम्स खोलने का फ़ैसला लिया गया है। वहीं, पासवान ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को ग़लत क़रार दिया।
पीएम मोदी ने सदन में शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों पर जमकर हमला बोला।उन्होंने कहा कि मुझे कुर्सी से हटाने की इनलोगों को बहुत जल्दी है।लेकिन कुर्सी से हटाने या बैठाने का निर्णय सवा सौ करोड़ देशवासी करेंगें।पिछली सरकारों में देश पर चुनाव थोपे गए।
न संख्या है, न बहुमत है, फिर भी सदन में प्रस्ताव।देश देख रहा है कि कैसी नकारात्मकता है।पीएम मोदी ने कहा, हम चौकीदार भी हैं, भागीदार भी, लेकिन आपकी तरह सौदागर और ठेकेदार नहीं। कांग्रेस ने परिस्थितियों को समझे बिना आंध्र का विभाजन किया, इसलिए परेशानी आई।साथियों की परीक्षा लेने के लिए अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जाना चाहिए।
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👉फिलहाल अविश्वास प्रस्ताव जारी है।आइये कुछ इतिहास पर नजर डालें।
*सबसे ज्यादा किसके खिलाफ प्रस्ताव?*
सबसे ज्यादा अविश्वास प्रस्ताव का रेकॉर्ड इंदिरा गांधी सरकार के नाम है जिसके कार्यकाल में 15 बार प्रस्ताव पेश किया गया। 1966 से 1975 के बीच 12 बार और 1981 एवं 1982 में तीन बार उनके खिलाफ प्रस्ताव पेश किया गया।

*कितनी बार सरकारें गिरीं*
अब तक सिर्फ तीन बार, 1990 में वी.पी. सिंह सरकार, 1997 में एच.डी. देवेगौड़ा सरकार और 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास हो गया और सरकार गिर गई।

7 नवंबर 1990 को वी.पी.सिंह ने उस समय विश्वास प्रस्ताव पेश किया था जब बीजेपी ने उनसे समर्थन वापस ले लिया था। सरकार के पक्ष में 152 वोट पड़े थे और खिलाफ 356। इस तरह सरकार गिर गई थी।

11 अप्रैल, 1997 को देवेगौड़ा सरकार विश्वास मत हासिल करने में नाकाम रही थी। सरकार के पक्ष में 190 और खिलाफ में 338 वोट पड़े थे।

17 अप्रैल 1999 को अटल बिहारी वाजपेयी सरकार सिर्फ एक वोटों से हार गई थी। सरकार के पक्ष में 269 वोट पड़े थे जबकि खिलाफ 270।

*आखिरी बार*
आखिरी बार अविश्वास प्रस्ताव 2003 में सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली तत्कालीन एनडीए सरकार के खिलाफ पेश किया था। यह अविश्वास प्रस्ताव बुरी तरह नाकाम रहा था क्योंकि सरकार के पक्ष में 325 वोट पड़े थे और खिलाफ 212 वोट।

*अविश्वास प्रस्ताव से पहले इस्तीफा*
तीन मौके ऐसे भी आए हैं जब प्रधानमंत्री ने अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग या उसको लोकसभा में पेश करने से पहले ही इस्तीफा दे दिया।

जुलाई 1979 में कांग्रेस लीडर वाई.वी.चाह्वान ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारीजी देसाई के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। वोटिंग से पहले ही मोरारीजी ने इस्तीफा दे दिया था। देसाई सरकार में अटल बिहारी वाजपेयी और एल.के.आडवाणी मंत्री थे।

जब कांग्रेस ने समर्थन वापस ले लिया था तो 20 अगस्त, 1979 को चौधरी चरण सिंह ने प्रस्ताव पेश किए जाने से पहले ही इस्तीफा दे दिया था।

तीसरा मौका 1996 में आया। 28 मई, 1996 को अटल बिहारी वाजपेयी ने अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान होने से पहले इस्तीफा दे दिया था क्योंकि बीजेपी के पास पर्याप्त संख्याबल नहीं था।

*इनके खिलाफ भी आया अविश्वास प्रस्ताव*
भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुरी शास्त्री के खिलाफ तीन बार अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया था। पहला 1964 में और 1965 के दौरान दो अविश्वास प्रस्ताव लाए गए थे।

1987 में राजीव गांधी सरकार के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था लेकिन ध्वनि मत से उस प्रस्ताव को हरा दिया गया था। पी.वी.नरसिम्हा राव के कार्यकाल में तीन बार प्रस्ताव पेश किया गया।

अब तक लोकसभा में 13 बार अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई है जिनमें पांच प्रधानमंत्रियों को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा है।

2008 का विश्वास मत
अमेरिका से न्यूक्लियर डील पर लेफ्ट फ्रंट ने यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया था जिसके बाद सरकार ने जुलाई 2008 में खुद से विश्वास मत पेश किया था। इस पर मतदान की अहमियत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि यूपीए और विपक्षी पार्टियों ने अपने बीमार सांसदों को भी वोटिंग के लिए बुला लिया। इसमें आखिरकार सरकार की जीत हुई थी। सरकार के पक्ष में 269 वोट पड़े थे और खिलाफ 263।

*मौजूदा स्थिति क्या है?*
वैसे मौजूदा समय में भी सरकार मजबूत स्थिति में दिख रही है। ऐसा माना जा रहा है कि मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव बड़ी आसानी से गिर जाएगा क्योंकि सदन में NDA के पास 315 सांसद (स्पीकर समेत) हैं। आपको बता दें कि 535 सदस्यों में से बहुमत का आंकड़ा 268 है। बीजेपी के पास दो नामित सदस्यों को शामिल करते हुए सदन में 273 सदस्य हैं। हालांकि एनडीए के अंतिम नंबर में थोड़ा कम-ज्यादा हो सकता है क्योंकि बीजेपी के कुछ सांसद असंतुष्ट हैं जबकि कुछ बीमार या विदेश में हैं।

उधर, विपक्ष के पास 222 सदस्यों के समर्थन की बात कही जा रही है, जिसमें कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए के 63, एआईएडीएमके के 37, टीएमसी के 34, बीजेडी के 20, टीडीपी के 16, और टीआरएस के 11 सांसद शामिल हैं।
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