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स्वच्छ भारत समर इंटर्नशिप कोर्स 2018 के 14वाँ दिन

ब्रजेश कुमार

आलमनगर,मधेपुरा

 

 

भारत सरकार एवं बिहार सरकार राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में बीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा के यू भी के कॉलेज कड़ामा, आलमनगर में  आयोजित स्वच्छ भारत समर इंटर्नशिप कोर्स 2018 के 14वाँ दिन  पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण  पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्धाटन कॉलेज के प्राचार्य माधवेन्द्र झा, उप प्राचार्य ललन कुमार झा, प्रो0 चंद्रशेखर मिश्र, ने संयुक्त रूप से दीप  प्रज्वलित कर किया। इस दौरान कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डॉक्टर झा ने कहा कि  पर्यावरण हमारे दिनचर्या के साथ-साथ संपूर्ण विश्व के लिए आवश्यक है। सभी जीवों की रक्षा करने के लिए एक प्रकृति प्रदत्त आवरण आकाश है, परंतु उसके नीचे सूरज, सूरज के नीचे एक ओजोन का आवरण है। यह आवरण अगर  हट जाए तो विश्व  जलकर राख हो जाएगा और  ओजोन  प्राकृतिक पर्यावरण है। इसे संजो कर रखना हम लोगों का फर्ज बनता है। उन्होंने कहा कि जैविक और अजैविक वस्तुओं का आवरण ही पर्यावरण है। प्रकृति के भंडार को अपना भंडार समझना होगा, उसकी पूर्ति करना भी हमारा कर्तव्य है। हवा की प्रतिपूर्ति नहीं हो सकती है, इसके लिए जन जागरण  की जरूरत है और वृक्षारोपण से ही शुद्ध हवा की प्रति-पूर्ति की जा सकती है। हम आए हैं परंतु बहुत कुछ छोड़ कर जाना ही हमारा दायित्व बनता है। हम आने वाले संतति के लिए दर्शन छोड़कर जाएं जिससे प्रकृति के आवरण की रक्षा हो सके। अपने आने वाली पीढ़ी के लिए हमें संकल्प लेना होगा कि पर्यावरण की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। आज खेतों  के  कचरे में आग लगाए जा रहे हैं जिससे हवा प्रदूषित हो रही है, लोगों को सांस लेने में कठिनाई हो रही है। लोग अनेक बीमारियों से ग्रसित होकर असमय काल के गाल में समा रहे हैं इसे रोकनी  होगी। जनसंख्या बढ़ रही है पहले जनसंख्या कम थी वन ज्यादा थी परंतु आज स्थिति भयावह है, यह वृक्ष हम से बचे चीज को ग्रहण करती है और हमें शुद्ध ऑक्सीजन देती है। हमारे द्वारा छोड़े गए अवशिष्ट कार्बन डाइऑक्साइड लेकर हमें ऑक्सीजन देती है। प्रकृति की जो व्यवस्था है हवा, जल, सुर्य, चांद की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। इस सृष्टि की रक्षा करना हमारा धर्म है। आवश्यकता है पर्यावरण की रक्षा के लिए नियमित रूप से वृक्षारोपण करें।  जल संरक्षण, वायु संरक्षण, मिट्टी संरक्षण एवं वन का संरक्षण स्वछता का संरक्षण के साथ-साथ स्वच्छ भारत के साथ ही हम विश्व की कल्पना कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जहां अस्वच्छता रहेगा, पर्यावरण अस्वच्छ रहेगा, जहां स्वच्छता रहेगा वहां का वातावरण स्वच्छ रहेगा। इसलिए हम सबों को आगे आकर समाज में गांव में लोगों को प्रेरित करना होगा। वही उपप्राचार्य ललन कुमार झा ने कहा कि आज चिमनी का धुँआ, बढ़ रहे वाहनों की संख्या  के कारण प्रदूषण विकराल रूप धारण कर रहा है। आज जल प्रदूषित हो रहा है कल-कारखाने के द्वारा कचरा नदी में बहाया जा रहा है। और गंदा पानी खेतों में आता है जिससे  फसल प्रदूषित हो रही है।

कार्यशाला के दौरान इंजीनियर सिपु ने   प्रोजेक्टर  के माध्यम से वन संरक्षण को लेकर लघु वृत्तचित्र दिखाया। साथ ही  इंटर्न के द्वारा वृक्षारोपण किया गया। कार्यशाला में कोऑर्डिनेटर प्रेमनाथ आचार्य पर्यवेक्षक प्रो चंद्रशेखर मिश्रा प्रो प्रकाश मिश्रा व्यवस्था समिति के रवींद्रनाथ आचार्य ,नंदन आचार्य कार्यक्रम अंबेसडर अभिषेक आचार्य , आरती कुमारी अजय कुमार, मोहम्मद आफताब आलम, विष्णु कुमार ,आनंद कुमार, पूनम कुमारी ,सुगंधा कुमारी, जुली कुमारी ,अस्मिता कुमारी सहित सैकड़ो इंटर्न मौजूद थ।

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