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वैज्ञानिक पद्धति से कृषि को बढ़ावा देने कृषि वैज्ञानिकों ने परमानंदपुर का निरीक्षण किया

14 जून, वीरपुर

ओ पी राजू

 

 

पटना और सबौर कृषि विश्वविद्यालय से आये कृषि वैज्ञानिकों ने परमानंदपुर का निरीक्षण करने के बाद पत्रकारों से कहा कि “इस इलाके के किसान वैज्ञानिक पद्धति से खेती कर आज भी खुशहाली कि जिंदगी बिता सकते हैं, कोसी के इस इलाके में खाद्यान्न एवं फलों के उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं”।

बुधवार को अटारी, पटना से आए कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर ए. के. सिंह, एसोसिएट डायरेक्टर डॉक्टर आर.एन. सिंह, डॉ बिपुल कुमार मंडल, डॉ विनोद कुमार एवं अन्य वैज्ञानिकों की टीम ने परमानंदपुर ग्राम के किसान भूषण भिखारी मेहता के फार्म हाउस का निरीक्षण किया। पत्रकारों से बात करते हुए उपर्युक्त वैज्ञानिकों ने बताया कि आज भी इस क्षेत्र की आवो- हवा, जलवायु और मिट्टी को देखने के बाद इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि वैज्ञानिक पद्धति से खेती कर यहाँ के किसान मालामाल हो सकते हैं। सबौर कृषि विश्वविद्यालय एवं पटना से आए एसोसिएट डाइरेक्टर डॉक्टर आर.एन. सिंह ने बताया कि इस इलाके में आम, लीची, जामुन, केला जैसे फलों के पौधो के खेती की अपार संभावनाएं हैं, जिससे किसानों को नगदी आमदनी मिल सकती है। श्री सिंह ने बताया कि इस संबंध में एक माह पूर्व सुपौल के जिला पदाधिकारी को आवश्यक रिपोर्ट्स सौंप दी गई है। श्री सिंह ने बताया कि आज किसान प्लास्टिक मल्चिंग विधि से सब्जियों की खेती कर उत्पादकता की लागत को कम कर, अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। प्लास्टिक मल्चिंग विधि में जहाँ पौधों के लिए पानी की आवश्यकता काफी कम रह जाती है,  वहीं मिट्टी में उपयोग किए गए उर्वरक का भरपूर लाभ पेड़ों को मिल पाता।

उक्त संबंध में जब सुपौल के जिला पदाधिकारी से फोन पर बात की गई तो उन्होंने

बताया कि किसानों की योजनाओं के लिये सरकारी राशि जिला प्रसाशन को मुहैय्या करवाई गई है, जिसे सुपौल आत्मा की देख-रेख में किसानों के लिए ख़र्च किया जाएगा।

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