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प्राउड ऑफ बिहार : छात्र राजनीति का राष्ट्रीय चेहरा बना मनीष

मनीष कुमार

संघर्ष के दम पर कोशी के कछार से छात्र राजनीति के जरिए महाविद्यालय से विश्वविद्यालय प्रदेश के रास्ते राष्ट्रीय क्षैतिज पर दमदार उपस्थिति दर्ज करा बीएनएमयू के छात्र नेता से राष्ट्रीय छात्र नेता के रूप मे पहचान बनाने वाले कोशी के सहरसा जिले के महिषी प्रखंड स्थित सरौनी गाँव निवासी एवं पूर्व पंचायत समिति सुधीर यादव के पुत्र मनीष कुमार की राजनीतिक सफलता से कोशी की राजनीतिक जमीन पुनः उर्वर हुई है ।

बिहार से 9 वर्ष बाद एक मात्र छात्र नेता के रूप मे मनीष कुमार को भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन ( एनएसयूआई ) के राष्ट्रीय टीम मे राष्ट्रीय संयोजक पद पर नियुक्त किया गया इस नए मुकाम पर मनीष के पहुंचने से कोशी समेत संपूर्ण बिहार मे संघर्षशील छात्र नेता और एनएसयूआई के कार्यकर्ताओ मे नई उर्जा का संचार हुआ है।

मिली जानकारी के अनुसार एनएसयूआई के राष्ट्रीय संरक्षक एवं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी के द्वारा पुरानी राष्ट्रीय कमिटी को भंग कर गत वर्ष अगस्त मे टाइलैंट हन्ट के जरिए नई राष्ट्रीय कमिटी मे देश भर के आम एनएसयूआई कार्यकर्ताओ के लिए रास्ता खोल दिया गया था योग्यता के अनुरूप पुरे हिन्दुस्तान से 250 से ज्यादा छात्र नेता ने राष्ट्रीय कमिटी के लिए आवेदन किया जिनको जवाहर लाल नेहरू लीडरशिप इंस्टीट्यूट के साक्षात्कार टीम ने चुन कर एनएसयूआई के संरक्षक राहुल गांधी एवं तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष फैरोज खान और राष्ट्रीय प्रभारी रूचि गुप्ता समेत एनएसयूआई के एक्जीक्यूटिव काउन्सिल को दिया। कई चरणो मे हुए साक्षात्कार के बाद 83 छात्र नेताओं के नाम पर सहमति बनी जिनको देश के विभिन्न राज्य मे 3 माह के लिए प्रभार दिया गया जिसमे फाइनल रूप से बेहतर प्रदर्शन करने वाले 50 छात्र नेताओ का एनएसयूआई राष्ट्रीय कमिटी मे चयन हुआ जिसमे बिहार से एक मात्र नेता मनीष कुमार राष्ट्रीय संयोजक के रूप मे राष्ट्रीय टीम मे जाने का गौरव हासिल किया ।

मनीष कुमार बीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा से एलएलबी फाइनल कर चुका है ।वर्ष 2009 में  सहरसा के एमएलटी कॉलेज अध्यक्ष के रूप मे अपनी छात्र राजनीति शुरू की. एमएलटी कॉलेज सहरसा में आइसीआर शुल्क वापसी आंदोलन मे कॉलेज प्रशासन के द्वारा किए गए एक मुकादमें में वर्ष 2011 में मनीष कुमार को ढाई महीने की जेल यात्रा करनी पड़ी थी . कई छात्र आन्दोलन सहित बीएनएमयू मे व्याप्त शैक्षणिक अराजकता के खिलाफ 3 महिने के आंदोलन मे लगातार 2 बार  15 दिन और 17 दिन का अनिश्चितकालीन आमरण अनशन कर ‘बीएनएमयू बचाओ’ आंदोलन से बिहार स्तर पर मनीष की पहचान बनी. मनीष ने लगातार 3 बार प्रदेश स्तरीय सांगठनिक आंतरिक चुनाव मे क्रमश: 2012 में प्रदेश सचिव, 2015 में प्रदेश महासचिव और 2017 मे राष्ट्रीय प्रतिनिधि पद पर जीतकर राष्ट्रीय छात्र राजनीति में महत्वपूर्ण दस्तक दिया और राष्ट्रीय नेतृत्व के द्वारा गत वर्ष दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव मे बतौर लॉ फैकल्टी प्रभारी के जिम्मेदारी को निभा दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव मे एनएसयूआई की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

इसके बाद मनीष को दिल्ली प्रदेश एनएसयूआई के प्रभारी के रूप मे जिम्मेदारी दी गई थी जिसमे मनीष के कुशल नेतृत्व और संगठनात्मक क्षमता और  बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए आॅल इंडिया एनएसयूआई के संरक्षक और अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष राहुल गांधी , एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष फैरोज खान, एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रभारी रूचि गुप्ता के द्वारा मनीष कुमार को भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन एनएसयूआई के  राष्ट्रीय संयोजक की नई जिम्मेदारी दी गई ।

एनएसयूआई के राष्ट्रीय संयोजक  के रूप मे मिली नई जिम्मेदारी पर मनीष ने कहा कि देश मे वर्तमान समय में छात्र और शिक्षा के हालात को देखकर यह जिम्मेदारी एक बड़ी चुनौती है जिसे संघर्ष के दम पर छात्र हित में काम करूंगा और कोशी समेत बिहार के स्वाभिमान को बढ़ाने की कोशिश करूंगा ।

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