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विदेश में बसे बिहारी लोगों के दिल में बसा है बिहार

आशीष कुमार । कोसी टाइम्स.

आज जब सोशल मीडिया का सदुपयोग की बजाय गलत उपयोग ज्यादा हो रहा हो तब कोई इसी फेसबुक, ट्विटर, लिंकडन जैसे ऑनलाइन सोशल मंचों का सदुपयोग करते हुए मैनलाईन यानि सरजमीं पर कुछ बेहतर कर रहा हो तो इसे एक नींव के पत्थर के तौर पर जरूर याद किया जा सकता है। अपने भारत से सात समंदर पार जर्मनी के बर्लिन में ‘बिहार फ़्रेटरनिटी’ की तरफ से 26 मई को बिहार दिवस का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन का तात्कालिक मकसद तो यह है कि विदेश में बसे बिहारी लोगों का एक समूह बनाना, पर ‘बिहार फ़्रेटरनिटी’ संस्था का लांग टर्म मकसद बिहार के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, खेलकूद व कला के क्षेत्र में बिहार की बेहतरी के लिए लगातार काम करना है। अपने अनौपचारिक गठन के साल भर के भीतर ही बिहार फ़्रेटरनिटी ने सोशल मीडिया पर अच्छी खासी पैठ बना ली है और विदेश में बसे भारतीय लगातार इससे जुड़ते ही जा रहे हैं। वही 26 मई को बर्लिन में बिहार दिवस के अवसर पर औपचारिक रूप से बिहार फ्रैटर्निटी जर्मनी का उद्घाटन किया जाएगा और साथ ही साथ बिहार की सरजमीं पर बेहतर बिहार के सपने को साकार करने के लिए रूपरेखा तैयार की जाएगी।

‘बिहार फ़्रेटरनिटी’ की नीव रखने वाले ‘प्रकाश शर्मा’ का जन्म पटना में हुआ है और उन्होंने अपनी शुरूआती पढ़ाई पटना में ही रह कर की है। उनके पिता डॉक्टर हैं और मूलतः जहानाबाद से आते हैं। प्रकाश पिछले सात वर्षों से जर्मनी में एक जापानी कम्पनी में टेक्निकल मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। उनका कहना है कि बिहारियों को लगता था कि जर्मनी में बिहारी एक्का-दुक्का ही हैं। इसी अवधारणा को तोड़ने के लिए उन्होंने एक साल पहले यूरोप में रह रहे बिहारियों के लिए एक फ़ेस्बुक ग्रूप बनाया। इसमें बिहार से संबंधित जानकारियाँ और सवाल पूछा जाता था। इसी से लोग जुड़ते गए। फिर जर्मनी के विभिन शहरों में प्रवासी बिहारियों के लिए मिलन समारोह करवाया गया जिसमें बिहार पर चर्चा होती और वह भी बिहार के भाषाओं में ही होती थी।

फेसबुक से शुरू हुए इस फ़ोरम को अब एक संस्था का रूप दिया गया है, जिसका नाम “बिहार फ़्रेटरनिटी” रखा गया है। यह एक ग्लोबल फ़ोरम है। इसका मक़सद यूरोप में रह रहे बिहारियों की मदद करना, बिहार के पर्व को मिलजुल कर मनाना, बिहार को एक ग्लोबल ब्राण्ड बनाना और साथ ही जो बिहार में रह कर बिहार को सींच रहे हैं उनके जीवन में अच्छा बदलाव लाने में मदद करना। वही शेखपुरा के अरविंद सिन्हा को संस्था का अध्यक्ष बनाया गया है। नौ लोगों की कोर कमिटी में प्रकाश शर्मा व अरविंद सिन्हा के अलावा रवि बरनवाल, रोशन झा, सुधांशु शेखर, ज़ुल्फ़ेकार अरफ़ी, कुमार राहुल, हिमांशु झा और सत्येष शिवम् भी शामिल हैं। अभी संस्था से केवल जर्मनी में ४०० सदस्य जुड़े हुए हैं वो भी अलग अलग परिवेश के, चिकित्सक से ले कर अभियंता तक, वैज्ञानिक से लेकर अभिनेता तक और प्रोफेसर से ले कर विद्यार्थी तक बिहार फ्रैटर्निटी से जुड़े हुए हैं।

२६ मई को जर्मनी की राजधानी बर्लिन में बड़े पेमाने पर बिहार दिवस मनाया जा रहा है। जर्मनी में भारतीय राजदूत इसकी मुख्य अतिथि हैं। इस दिन बिहार की बेहतरी के लिए चर्चा होगी और साथ ही साथ एक रंगारंग कार्यम का भी आयोजन होगा, जिसमें सूरिनामी भोजपुरी गायक राज मोहन और माइकल जैक्सन ट्रिब्यूट आर्टिस्ट टामी बोसे भी हिस्सा ले रहे हैं। इसी दिन “बिहार फ़्रेटरनिटी जर्मनी” को विधिवत लॉंच भी किया जाएगा। साथ ही “योजना ज्योति” की नीव रखी जाएगी, जिसके तहत बिहार के दो गाँव के कुछ हाई स्कूल के ग़रीब बच्चों को रोज़ाना विद्यालय के अलावा मुफ़्त शिक्षा दी जाएगी। वही बीच बीच में जर्मनी में रह रहे बिहारियों द्वारा भी इन बच्चों की क्लास ली जाएगी।

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