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महर्षि मेंही जन्म भूमि पर सत्संग का हुआ समापन

सोहन कुमार 

कोसी टाइम्स @ बनमनखी,पूर्णिया.

अखिल भारतीय संतमत सत्संग का  तीन दिवसीय 20 वां महाधिवेशन 18 फरवरी को महर्षि मेंही जन्म भूमि सिकलीगढ़ धरहरा बनमनखी में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के मुख्य आयोजन कर्त्ता  गुरुमहाराज के भ्रातृत्व पुत्र श्री आंनद स्वामी जी महराज रहे । उक्त सत्संग विगत 20 वर्षों से गुरुमहराज के जन्म भूमि पर आयोजित की जा रही है। सतसंग का लक्ष्य संतमत के विभिन्न मतान्तर को मिटाना है। उक्त कार्यक्रम में स्थानीय लोगों के अलावा विभिन्न क्षेत्रों जैसे उड़ीसा, लखीसराय, मधेपुरा, सहरसा सुपोल, किशनगंज, बेगूसराय, भागलपुर यहां तक कि पड़ोसी देश नेपाल तक से सत्संग के प्रेमी सत्संग सुनने आये हुए थे ।

समापन के मुख्य अतिथि अनुमंडल पदाधिकारी मनोज कुमार बाबा के जन्म भूमि पर पहुंच कर ख़ुशी जाहिर किया । इस अवसर पर श्री गुरुसरण बाबा, सुबोधानंद जी महाराज, श्री सरनागत बाबा, श्री ठाकुर बाबा एवं अन्य साधुओं ने उपस्थित श्रधालुओं को प्रवचन का रसपान कराया  । इसके अलावा स्वामी गुरुसरण बाबा ने अपने प्रवचन में कहा कि तुलसी कृत रामायण में लुलसी दास ने लिखा है बिनु सतसंग बिबेक ना होई राम कृपा बिनु सुलभ न सोई अर्थात सतसंग के बिना ज्ञान प्राप्त नहीं हो सकता है । लोग अपनी सारी चिंताओं को दूर करके ध्यान-साधना का रास्ता अपनाते हैं। सतसंग ही एक रास्ता है जहां लोगों को शांति प्राप्त होती है । उन्होंने कहा ज्ञान प्राप्ति के साधन मुख्य तौर पर हमारी पांच ज्ञानेंद्रिय आंख, नाक, कान,जीभ व त्वचा है।परंतु इनके वाबजूद भी सभी ज्ञान खुद प्राप्त नहीं कर सकते इसलिए लोगों को श्रुत ज्ञान व आप्तवचनात्मक ज्ञान की प्राप्ति के लिए सत्संग करना एवं सुनना चाहिए ।

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से संजय कुमार पोद्दार, कुंदन मल्लिक, सत्यनारायण मंडल, कलानंद शर्मा, अनिल मंडल, पंकज, प्रकाश ततमा के अलावा समस्त सिकलीगढ़ धरहरा वासियों का अहम योगदान रहा।

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