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अपनी शक्ति पर भरोसा रखना बहुत जरूरी है

संजय कुमार सुमन 

उप सम्पादक@कोसी टाइम्स 

अक्सर लोग अपनी ताकत को लेकर आशंकित रहते हैं. हम जब अपने आप पर, अपनी शक्ति पर शंका करने लगते हैं तो यहीं से हमारी असफलता की शुरुआत हो जाती है। ‘विजय हमेशा आत्मविश्वास से हासिल होती है.’ अगर हमें खुद पर विश्वास नहीं हो तो छोटी-छोटी समस्याओं से ही हम घबरा जाएंगे और कभी जीत हासिल नहीं कर पाएंगे.यदि हम अपने अतीत पर नज़र डालेंगे, तो पाएंगे कि आज हम जो कुछ भी हैं वो अतीत में हमारे द्वारा किए गए प्रयासों का ही नतीजा है. जी हां, सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता. भाग्य कुछ समय के लिए भले ही आपका साथ दे, लेकिन सफलता की लंबी पारी खेलने के लिए आपको कड़ी मेहनत करनी ही होगी. यही सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है.

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शॉर्टकट से नहीं मिलती सफलता
कई लोग मेहनत करने की बजाय भाग्य के भरोसे बैठे रहते हैं या फिर ईश्‍वर की पूजा-प्रार्थना में लगे रहते हैं और जब कामयाबी नहीं मिलती, तो भाग्य को कोसने लगते हैं या फिर कहते हैं कि ईश्‍वर उनका साथ नहीं देता. अब बिना मेहनत किए कुछ भी कैसे हासिल हो सकता है. आप किसी भी कामयाब व्यक्ति के जीवन पर नज़र डालिए, आपको इस बात का अंदाज़ा हो जाएगा कि सफलता पाने के लिए उन्होंने कितनी मेहनत की है. सफलता भाग्य या शॉर्टकट से नहीं मिलती, उसे हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत और लगन की ज़रूरत होती है.

How to get success in Life

कल कभी नहीं आता
ज़्यादातर लोग अच्छे मौ़के इसलिए चूक जाते हैं, क्योंकि वो अपने काम कल पर टाल देते हैं. उनका कल कभी नहीं आता और मौक़ा हाथ से निकल जाता है. अतः किसी भी काम को करने के लिए कल का इंतज़ार कभी नहीं करना चाहिए. हम अगले पल के बारे में नहीं जान सकते, तो कल के बारे में कैसे जान सकते हैं कि कल क्या होगा. अतः काम को कल पर टालने की बजाय हर समय मेहनत से काम करें और हर काम को अपना शत-प्रतिशत दें, फिर आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता.

सफल व्यक्ति के गुण
ऐसा नहीं है कि सफल व्यक्ति में कोई विशेष गुण होता है, हम सभी में वो गुण हैं, लेकिन हम कभी उनका उचित प्रयोग नहीं करते. सफल व्यक्ति भी हम सबकी तरह सपने देखता है, लेकिन वो स़िर्फ सपने नहीं देखता, बल्कि दिन-रात अपने सपने का पीछा करता है और उसे पूरा करके ही दम लेता है. अपने सपने को पूरा करने के लिए वो पहले लक्ष्य निर्धारित करता है, फिर उस लक्ष्य को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करता है, पूरी लगन से उससे जुड़ा हर काम सीखता है और उसमें महारत हासिल कर लेता है. फिर जब वो अपने काम में पारंगत हो जाता है, तो सफलता अपने आप उसके पास खिंची चली आती है. बस, यही है सफलता का मंत्र और उसे हासिल करने का सही तरीक़ा.

Success Tips

स्वामी विवेकानंद के अनुसार एक विचार लें. उस विचार को अपनी ज़िंदगी बना लें. फिर उस विचार के बारे में सोचिए, उसके सपने देखिए, उस विचार को जीएं. आपका मन, आपकी मांसपेशियां, आपके शरीर का प्रत्येक अंग, सभी उस विचार से भरपूर हों और आप सभी दूसरे विचारों को छोड़ दें, यही सफलता का तरीक़ा है.अब्दुल कलाम साहब ने कहा है कि इंतज़ार करने वाले को उतना ही मिलता है जो कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं.अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के अनुसार कुछ करने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति के लिए इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है.
इस बात को श्रीरामचरित मानस के एक प्रसंग से समझ सकते हैं…

अपनी शक्ति पर भरोसा रखना बहुत जरूरी है

श्रीरामचरित मानस के एक प्रसंग में जब भगवान श्रीराम के साथ वानर सेना समुद्र के किनारे तक पहुंच गई, तब यह विचार किया जाने लगा कि समुद्र को कैसे पार किया जाए. उसी समय लंका में भी भावी युद्ध को लेकर चर्चा चल रही थी. रावण ने जब इस संबंध में अपने मंत्रियों से राय मांगी तो लगभग सभी मंत्रियों ने कहा कि जब देवताओं और दानवों को जीतने में कोई खास मेहनत नहीं करनी पड़ी तो मनुष्यों और वानरों से क्या डरना.

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उस समय विभीषण ने रावण को बहुत समझाया कि श्रीराम से संधि कर लेनी चाहिए और सीता को आदर सहित श्रीराम को लौटा दिया जाना चाहिए. इससे युद्ध से बचा जा सकता है. विभीषण का मानना था कि श्रीराम से युद्ध करने पर राक्षस कुल का विनाश हो जाएगा. लेकिन विभीषण की बात सुनकर रावण को क्रोध आ गया और उसने विभीषण को लात मारकर लंका से निकाल दिया. इसके बाद विभीषण श्रीराम की शरण में पहुंचे.विभीषण को देखकर वानर सेना में खलबली मच गई. सुग्रीव ने श्रीराम को सुझाव दिया कि विभीषण रावण का छोटा भाई है, इसलिए इसे बंदी बना लेना चाहिए. सुग्रीव ने कहा कि हो सकता है, वह हमारी सेना का भेद लेने आया हो. इस पर श्रीराम ने सुग्रीव को जवाब दिया कि हमें अपनी ताकत और सामर्थ्य पर पूरा भरोसा है. विभीषण शरण लेने आया है, इसलिए उसे बंदी बनाना उचित नहीं होगा. अगर वह भेद लेने आया है, तो भी हम पर कोई संकट नहीं है. हमारी सेना का भेद लेकर भी वह कुछ नहीं कर सकेगा. इससे हमारा बल कम नहीं होगा. दुनिया में जितने भी राक्षस हैं, उन्हें अकेले लक्ष्मण ही क्षण भर में खत्म कर सकते हैं. इसलिए हमें विभीषण से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उससे बात करनी चाहिए.इस प्रसंग में यही बताया गया है कि व्यक्ति को अपनी शक्ति पर पूरा भरोसा होना चाहिए. इसी भरोसे के बल पर ही जीत हासिल की जा सकती है.

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