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हंसी के फुहार : पटना केमेस्ट्री क्लास वाली बेदर्द प्रेमिका

इस भाग -दौर भरी जिन्दगी में थोड़ा हँसते मुस्कुराते रहना चाहिए .इसलिए कोसी टाइम्स ने एक कॉलम शुरू किया है हंसी के फुहार .आज पहली फुहार के रूप में हम अपने नियमित पाठक प्रिंस राज ओम द्वारा रचित फुहार आपके सामने  प्रस्तुत कर रहे है ……………
तुम बहुते याद आती हो । मैट्रिक पास कर के जब हम पटना आये थे तो पहिलके दिन chemistry के क्लास में तुम भेंटा गई । जैसे हीं तुम पर नजर पड़ी पूरा देह का रुइयाँ-रुइयाँ खड़ा हो गया। एक साथ calcium,vitamin iron और ना जाने का का फनफनाए लगा देह में । उ दिन तुम अगुलका बेंच पर बैठी थी,और हम पिछुलका पर बैठे तुम को देख रहे थे। मास्टर जी परिचय करवा रहे थे सबका। जैसे हीं तुम अपना नाम बोली :-सोनिया। दिल साला टेनिस बॉल की तरह उछले लगा। हम तो अपना नाम के साथ जोड़ियो लिए थे तुम्हरा नाम तभीये। महिंदर संग सोनिया, बाप रे केतना गज्जब लगता था सुने में।
जब रूम पे गए तो भरो रात तुम्हीं को सोचे। अगिला दिन से तुम्हरे बगल के बेंच पर बैठे लगे। तुम रोज कपड़ा बदल के आती थी।तोरा देखौश में हम भी पैसा बचा के दुगो t-shirt और दुगो जीन्स खरीद लिए। हम भर क्लास में 2 घंटा खाली तुम्हीं को देखते थे और तूम थी कि भविषे कभी देखती थी।सोचते रहते थे की पहचान कैसे होगी। फिर मास्टर जी एगो सवाल पूछे, बोले:- कौन बताएगा जवाब? हम सोचे इहे मौका है तुमको अपने आप को देखावे का। हम फट से खड़ा हो गए। जवाब हमको आता नहीं था, पर अट्टकड़ी मारे सही हो गया। हमको लगा हो गया मेरा काम। एक दिन तुम्हरे कॉपी में “honey singh”का फोटू देखे हमको लगा तुम उसकी फैन होगी एहीसे हम जाके अपना ‘तेरे नाम’ को ‘हनिया कट’ कटवा लिए थे। अगिला दिन क्लास आये तो सब हमको देख के हंस रहा था। उ दिन तुम फहली बार हमको देख के हंसी थी, कसम से पूरा देह प्यार से झनझना गया था।
फिर एक दिन तुम हमसे थोड़ा सा बात की, हमको लगा हो गया। लेकिन कुछ दिन बाद तुम क्लास आना बंद कर दी। 1दिन 2दिन हफ्ता भर, महीना भर राह देखे तुम नहीं आयी।उ तो संजोग से तुम्हरे गांव के लड़का से हमर दोस्ती हो गया था, पूछे तो पता चला कि ‘तुम पटना में किसी लड़का से फंस गई थी’। एहीसे तुम्हरा बाबूजी गांव ले जाकर तुम्हरा बियाह करवा दिए। जैसे हीं ई खबर सुने हमरा पूरा देह में बूझो तो लकवा मार दिया था।2बोतल ग्लूकोच चढ़ा। फिर हमहुँ क्लास जाना बंद कर दिये।बीमार हो गए थे हम। सोचते रहे कि- तुम हमसे फसी होती। काश हम तुमको कभी कह पाते काश तुम हमरे अनकहे भाव कभी सुन पती। एक दिन तुम इधर सपना में आई थी , सपने में इतना जोड़ से तकिया पकड़े की पूरा तकिया का रुइया फुर्र फुर्र निकल गया। अब हम भी घर आ गए हैं । माई कहती है कि हम दुबारा गए हैं। रोज काजू,किसमिस,बादाम,छुहारा ओर दूध में हरदी डाल के 3 टाइम पिलाती है।कहती है बहुते कमजोर हो गया है।अब उसको कैसे कहें कि ई कमजोरी खाने पीने के चलते नहीं बल्की ई तो उ chemistry class और तुम्हरा है जहाँ से हमर calcium, vutamin, iron और ना जाने का-का तुम्हरे साथ चल गया। तुम्हरा महिंदर………………….. 

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